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आधा किलो के मुर्गे की कीमत 21 हजार, वजह जान हैरत में पड़ जाएंगे आप

महज 400 रुपए में बिकने वाली मुर्गी के उल्टे पंखों ने उसकी कीमत हजारों में पहुंचा दी है। चौंकिए नहीं...यह बिल्कुल सच है।

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Lali Kosta

Nov 04, 2016

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जबलपुर। महज 400 रुपए में बिकने वाली मुर्गी के उल्टे पंखों ने उसकी कीमत हजारों में पहुंचा दी है। चौंकिए नहीं...यह बिल्कुल सच है। उल्टे पंख की मुर्गियों के लिए तंत्र-मंत्र में विश्वास करने वाले लोग कई गुना कीमत चुका रहे है।

इसका फायदा मुर्गी के कुछ कारोबारी उठा रहे है। वे देशी नस्ल की उल्टे पंख वाली इस विशेष प्रजाति की मुर्गियों को मुंह मांगे दाम में बेच रहे है। उल्टे पंख के साथ ही मुर्गी के रंग और कलगी की संख्या के आधार पर उसकी कीमत तय की जा रही है।

11 और 21 कलगी वाले उल्टे पंख के काले रंग के मुर्गे की 21 हजार रुपए तक के मूल्य पर मांग बनी हुई है। हालांकि मुर्गी पालन से जुड़े विशेषज्ञ इन मुर्गियों को सामान्य ही बता रहे है। सिर्फ एक जीन के कारण इनके पंख उल्टे होने का दावा किया है।

7 कलगी वाले काले मुर्गे का मुंह मांगा दाम
उल्टे पंख वाली इन मुर्गियों के रंग और सिर पर ऊगने वाली लाल कलगी की संख्या के आधार पर दुकानदार इनकी बाजार में कीमत तय कर रहे है। मुर्गी कारोबारी मोनू के अनुसार सामान्य तौर पर देशी मुर्गी के पंख दो रंग(लाल-काले, सफेद-काले) में होते है।

सिर पर लाल रंग की कलगी तीन/पांच होते है। लेकिन कुछ मुर्गियों में कलगी 5 से ज्यादा होती है। एेसी मुर्गी का रंग यदि पूरा काला है, तो कुछ ग्राहक मुंह मांगा दाम चुकाते है। उल्टे पंख वाली मुर्गियां बेहद मुश्किल से ही मिलती है। इनकी ग्यारस(देवउठनी) तक मांग रहती है।


दूर गांव से आ रही खेप
शहर में उल्टे पंख वाली मुर्गियों की खेप छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही है। जानकारों के मुताबिक दीपावली से ग्यारस तक विशेष प्रकार के काले मुर्गे-मुर्गियों की मांग रहती है। इस दौरान मुर्गियों की अपेक्षाकृत कई गुना ज्यादा कीमत मिलती है।

इसके चलते ग्रामीण वर्ष भर विशेष प्रकार की इन गिनी-चुनी मुर्गियों का पालन करते है। इसके बाद दीपावली के वक्त बाजारों में भेजते है। इनकी संख्या विरल होने के कारण कुछ गिनी-चुनी दुकानों में ही एेसे मुर्गे मिल रही है। जिस पर दुकानदार भी जमकर मुनाफाखोरी कर रहे है।

एक्सपर्ट व्यू
वेटरनरी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर भारद्वाज के अनुसार यह देशी मुर्गी की एक प्रजाति है। इनमें फ्रेजल जीन होता है। यह जीन ठीक उसी प्रकार है जैसा कि मानव में बौना प्रजाति होती है। कई लोगों के बीच में कुछ कम कद के व्यक्ति होते है। उसी प्रकार फ्रेजल जीन के कारण कुछ मुर्गियों के पंख खड़े रहते है। ये सिर्फ देशी मुर्गी में ही होते है। इसका बाकी सभी बर्ताव और गुण सामान्य मुर्गियों की तरह ही होता है। लेकिन इनकी संख्या काफी कम रहती है।