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अन्ना बोले- किसानों की दुर्दशा और लोकपाल बिल पर दिल्ली में होगा आंदोलन का शंखनाद

शहीदी दिवस 23 मार्च से होगी आंदोलन की शुरुआत, लोगों को जागरुक करने देश भर का दौरा कर रहे हैं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना

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Announcement of kisan aandolan by activist Annas hazare in Delhi

जबलपुर। भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी और लूट जारी है। 30 दिन में विदेश से कालाधन वापस लाने का वादा पूरा नहीं हुआ। हर बैंक खाते में 15 लाख तो दूर 15 रुपए भी नहीं आए। सबकी तरह मुझे भी उम्मीद थी, अच्छे दिन आएंगे। तीन साल मैने भी इंतजार किया। लेकिन आज देशभर में किसान आत्महत्या कर रहे हैं, उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है। आखिर किसके पास जाएं। इसीलिए किसानों व लोकपाल के लिए के लिए २३ मार्च को शहीदी दिवस से आंदोलन का शंखनाद करेंगे। अब आर या पार की होगी...। यह बात चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मंगलवार को जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। पत्रकारों से मुलाकात के बाद वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के लिए सतना रवाना हो गए। अन्ना ने कहा कि दिल्ली में आंदोलन में शामिल होने लोगों को बुलाने के लिए मैं देश भर के दौरे कर रहा हूं। उड़ीसा से दौरे की शुरुआत हुई। महाराष्ट्र, मप्र, तमिलनाडू, उप्र, असम, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, बैंगलोर, फरीदाबाद के दौरे कर चुका हूं।

धन विधेयक के नाम धोखाधड़ी
अन्ना ने कहा कि वित्त विधेयक को धन विधेयक के नाम पर राज्यसभा में रखकर धोखाधड़ी की है। उन्होंने आरोप लगाया देश में कंपनियों को जितना लाभ होता है उसमें से 7.6 प्रतिशत राशि सत्ताधारी दल को जाता है। एेसा कानून बना दिया कि जितना चाहे राजनीतिक पार्टी को दान दिया जा सकता है, उसका कोई हिसाब नहीं रखना है। मुझे सुनने मिला है की उद्योगपतियों से सत्ताधारी दल को 4 महीने में 80 हजार करोड़ रुपए मिल गए।

किसानों को मिले पेंशन
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि 60 साल के हो चुके आर्थिक रूप से कमजोर किसानों न्यूनतम पांच हजार की पेंशन दी जानी चाहिए। किसान पेंशन बिल संसद में लंबित है, लेकिन सरकार को जीएसटी बिल और अडानी, अंबानी जैसे उद्योगपतियों की ज्यादा चिंता है।

आंदोलन से मिला सबक
इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मुहिम के नाम पर अन्ना हजारे के चेहरे को मोहरा बनाकर कुछ लोगों के द्वारा राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध किए जाने के सवाल पर कहा कि मैने सबक ले लिया है। अब सौ रुपए के स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र लूंगा। जिसमें आंदोलन में शामिल लोगों को लिखकर देना होगा की उनका चरित्र शुद्ध रहेगा, किसी राजनीतिक पार्टी में नहीं जाउंगा व देश की सेवा करूंगा। उन्होंने कहा मैं किसी से कुछ मांगने नहीं निकला हूं। मुझे चुनाव नहीं लडऩा है। 25 साल की उम्र में प्रण लिया था कि जब तक जिऊं गा गांव, समाज और देश के लिए जिऊं गा। 80 साल का हो गया हूं। समाजसेवी कार्यकर्ता टिकट भेजकर बुलाते हैं तो पहुंच जाता हूं तो लोगों को जगाने का काम कर रहा हूं।

लोकपाल के नाम पर धोखा
हजारे ने कहा कि वर्ष 2011 में लोकपाल, लोकायुक्त के लिए पूरा देश एकजुट हो गया था। यूपीए की सरकार को कानून बनाना पड़ा। एनडीए की सरकार से उस पर अमल की अपेक्षा थी। लेकिन सरकार ने उसे औश्र कमजोर करने का प्रयास किया। जितने अधिकारी हैं उनके बच्चे, पत्नी की संपत्ति का खुलासा हर साल करने का प्रावधान था उसे हटा दिया। लोकपाल बिल 1966 से 8 बार संसद में बिल आया पर पास नहीं हुआ।

संविधान में चिन्ह का प्रावधान नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि संविधान में पक्षवार पार्टी का कोई उल्लेख नहीं है। फिर चुनाव चिन्ह कहां से आए। उन्हें हटाना चाहिए। इसे लेकर ६ साल से लड़ाई जारी है। चुनाव आयोग के साथ पांच बैठक हो गईं। लेकिन जवाब मिलता है इन्हें नहीं हटा सकते। बाद में आयोग ने लोकसभा व विधानसभा में चुनाव उम्मीदवार का नाम और फोटो डाल दिया। राजनीतिक दलों के समूह के कारण गुंडागर्दी, लूट मची, जाति-पाती का समाज में जहर घुल गया। संविधान के अनुसार अगर चीजें होती तो भ्रष्टाचार नहीं होता।

पैसे वाली सोच
आगामी 2019 के चुनावों में में मतदाता किसे चुनें...? इस सवाल के जवाब में अन्ना ने कहा कांग्रेस व भाजपा की सोच सत्ता से पैसा वाली है। देश की दोनों को परवाह नहीं है। राजनीतिक दलों में व वंशवाद की राजनीति हावी है। इसलिए लोगों को जगा रहा हूं। जिससे वे गुंडा, बदमाश किसी पक्षवार पार्टी को वोट न दें। जिससे वे योग्य उम्मीदवार को वोट दें ये व्यवस्था लागू हो गई तो देश में पक्षवार पार्टियों की राजनीति खत्म हो जाएगी और लोकतंत्र आ जाएगा।