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अनूप जलोटा खोलेंगे भजन-गायन प्रशिक्षण संस्थान, इस शहर में होगी शुरुआत

उभरते गायकों को शास्त्रीय व भजन गायन के सिखाएंगे गुर

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Anoop Jalota will open the Bhajan singing Training Institute

जबलपुर। 1990 के दशक में अपनी अनूठी भजन गायन शैली से संगीतप्रेमियों के दिलों में अपना अलग मुकाम बनाने वाले भजन सम्राट अनूप जलोटा का दावा है कि वे हिंदुस्तान की इस कला को विलुप्त नहीं होने देंगे। जलोटा ने उभरते गायकों को शास्त्रीय संगीत, भजन, गायन सिखाने के लिए लखनऊ में जल्द ही प्रशिक्षण केंद्र खोलने की मंशा जताई है। नगर प्रवास पर आए जलोटा ने पत्रिका से विशेष चर्चा के दौरान ये बात साझा की। प्रस्तुत हैं पत्रिका के सवाल और जलोटा के जवाब-

सवाल- नयी पीढ़ी में भजन गायकी के प्रति रूझान बहुत कम हो गया है। क्या सोचते हैं?

जलोटा- जी हां, कुछ अरसे से यह देखने में आ रहा है। पर एेसा नहीं है कि प्रतिभाएं नहीं है । मप्र, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश के कई नवोदित गायक भजन गायकी के प्रति गंभीर हैं। कुछ तो बेहद प्रतिभावान हैं। थोड़ा समय दीजिए, आपको मुझसे भी अच्छे भजन गायक सुनने को मिलेंगे।

सवाल- आप भजन व शास्त्रीय संगीत के लिए क्या कर रहे हैं?

जलोटा- मेरा पूरा प्रयास है कि भजन गायन को संरक्षण व बढ़ावा दिया जा सके। मैने योजना बनाई है कि प्रशिक्षण केंद्र में शास्त्रीय व भजन संगीत की तालीम दी जाए। इस दिशा में मैने कार्य भी आरंभ कर दिया है। जल्द ही यह संस्थान साकार रूप में दिखेगा।

सवाल- गायकी के लंबे सफर में कोई यादगार पल?

जवाब- एक बार लंदन में मेरा कार्यक्रम था। वहीं लता मंगेशकर का कार्यक्रम भी चल रहा था। मैं वहां पहुंचा, तो लता जी ने मुझे गाने के लिए मंच पर आमंत्रित किया। मैने उनके साथ ' रघुपति राघव राजाराम Ó व 'पायो जी मैने राम रतन धन पायो Ó भजन गाए। वे पल मेरी जिंदगी के अविस्मरणीय और रोमांचक पल थे।

सवाल- संस्कारधानी के लोगों के लिए संदेश?

जवाब- जबलपुर प्रगति के रास्ते पर चल पड़ा है। देश का ध्यान इस पर पड़ा है। मेरा संदेश है कि यहां के युवा भी खुद को स्मार्ट बनाएं। अपने विचार, संस्कार का ध्यान रखिए, उन्हें स्मार्ट बनाईये।

मुन्नी बदनाम हुई दो चार दिन, पुराने गीत अब भी जुबां पर
जलोटा बोले कि यदि आप देर तक अपने जीवन में संगीत का साथ चाहते हैं तो वह शास्त्रीय संगीत ही हो सकता है। विनोद भरे अंदाज में उन्होंने कहा कि मुन्नी बदनाम हुई तो दो चार दिन के लिए ही हुई, पर बरसों पुराने शास्त्रीय धुनों पर आधारित गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

बोले-अब बनी घर-घर की पत्रिका
जलोटा ने पत्रिका समाचार समूह की प्रशंसा करते हुए कहा कि मैें जहां-जहां जाता हूं, खोजकर पत्रिका पढ़ता हूं। यह हिंदी के सर्वोत्तम समाचार पत्रों में से एक है। अपने निराले अंदाज व निर्भीक पत्रकारिता की वजह से अब तो यह घर-घर की पत्रिका बन गई है।