
arogya setu app
यह है स्थिति
- जिले में 4 लाख 99 हजार लोगों ने डाउनलोड किया एप।
- 24 हजार 7 के करीब लोगों को ब्लूटूथ से खतरे का संकेत मिला।
- एप के बिना फीचर फोन से जानकारी देने वालों की संख्या 9 हजार 75।
- 718 लोगों ने ही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की प्रक्रिया पूरी की।
- अभी तक जिले में पॉजीटिव मरीजों की संख्या 14,703 है।
जबलपुर। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के अलावा आरोग्य सेतु एप भी मददगार बन रहा है। यही कारण है कि जिले में करीब 5 लाख लोगों ने इस एप को अपने एंड्राइड फोन में अपलोड किया है। अब तक ब्लूटूथ के जरिए कॉन्टेक्ट टे्रसिंग में करीब 24 हजार 700 लोगों को यह संकेत मिला कि उनके आसपास और कुछ मीटर की दूरी पर कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति हैं, इसलिए सतर्क हो जाएं। इस संकेत की वजह से लोगों ने अपने को सुरक्षित किया। आरोग्य सेतु कोरोना टे्रसिंग एप है। जब तेजी से कोरोना का संक्रमण फैल रहा था तो काफी संख्या में लोगों ने इसे अपने मोबाइल फोन पर अपलोड किया। अभी कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है। जिले में रोजाना 50 से लेकर 80 तक नए कोरोना मरीज मिल रहे हैं। इस खतरे से बचाव में यह एप काफी मददगार भी साबित हुआ है। वहीं जिनके पास फीचर फोन हैं, उन्होंने 1921 नंबर पर कॉल कर अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भेजी।
आसपास कितने पॉजिटिव मरीज
यह एप न केवल अपने पास कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति का संकेत ब्लू टूथ टे्रसिंग के माध्यम से देता है बल्कि 500,1000 मीटर और उससे ज्यादा की दूरी पर कितने व्यक्ति कोरोना पॉजीटिव हैं। कितने लोगों ने अपने स्वास्थ्य संबंधी मूल्यांकन को उसमें दर्ज कराया है, यह तमाम जानकारी एप में उपलब्ध होती हैं। जो व्यक्ति पॉजिटिव हुए, उन्हें भी यह एप डाउनलोड कराया गया था। अभी प्रदेश सरकार ने सार्थक एप बनाया है। उसे तो अनिवार्य रूप से डाउनलोड कराया जाता है। इसमें होम क्वॉरंटीन, संस्थागत क्वॉरंटीन एवं आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना के मरीज शामिल हैं।
जिन लोगों के पास एंड्राइड फोन नहीं हैं उनके लिए 1921 नंबर का फोन नंबर जारी किया गया है। जिले में अभी तक 9 हजार 75 लोगों ने इस नंबर पर कॉल कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी। इसमें लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित कुछ सवाल पूछे जाते हैं लेकिन कई लोग इस प्रक्रिया को पूरा ही नहीं करते। इसलिए उनका आंकलन अधूरा रहता है। अब तक करीब 718 लोगों ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया है। इसमें 36 व्यक्ति हाई रिस्क मिले। 60 मीडियम और 622 के करीब लो रिस्क वाले व्यक्ति पाए गए। इसी प्रकार एंड्राइड फोन वाले व्यक्ति भी स्वास्थ्य संबंधी स्व-मूल्यांकन हर समय नहीं करते।
Published on:
11 Dec 2020 08:40 pm
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