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इस देश की राजधानी का नाम ‘अयोध्या’, ‘रामायण’ पात्रों पर बच्चों के नाम

अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्फ्रेंस में बतौर विशिष्ट अतिथि आए 73 वर्षीय नारायण ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का पात्र आदर्श राजा के जीवन के लिए सबसे बड़ी सीख हो सकता है।

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Abha Sen

Dec 19, 2016

ramayan

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जबलपुर। यहां तक कि थाइलैंड की पुरानी राजधानी का नाम भी अयोध्या है। कई देशों के लोग अपने बच्चों के नाम भी रामायण के पात्रों के नाम पर रखते हैं। रामायण के पात्र त्याग, तपस्या, नैतिक मूल्य और सेवा भाव से सुसज्जित सर्वकालिक रोल मॉडल हैं। उनके कृतित्व को आत्मसात कर लिया जाए तो दुनिया के सभी झमेले खत्म हो जाएं।

यह बात थाइलैंड से आए यूएन की एजेंसी एशिया पैसिफिक टेलीकम्युनिटी के पूर्व महासचिव अमरेन्द्र नारायण ने पत्रिका से बातचीत में कही। अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्फ्रेंस में बतौर विशिष्ट अतिथि आए 73 वर्षीय नारायण ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का पात्र आदर्श राजा के जीवन के लिए सबसे बड़ी सीख हो सकता है। उन्होंने राज धर्म निर्वहन के लिए पत्नी सीता का भी त्याग कर दिया। सीता की पवित्रता का भाव सभी महिलाओं के लिए अनुकरणीय होना चाहिए।


रामायण के एक और पात्र भरत ने भ्राता राम के वन जाने पर राज सिंहासन स्वीकार नहीं किया, बल्कि बड़े भाई की अयोध्या वापसी तक ट्रस्टी (प्रजा के रखवाले) की भूमिका निभाई। वहीं लक्ष्मण ने नि:स्वार्थ भाव से भ्राता धर्म का पालन किया। वे श्रीराम की परछाईं की तरह उनके साथ चले। रामायण के पात्रों से मिलने वाली सीख को इंडोनेशिया, थाइलैंड जैसे कई देशों में लोग अंगीकार कर रहे हैं।


हनुमान से ये सीखें
रामायण में बजरंगबली की भूमिका पर शोध करने और उनके जीवन पर हनुमत श्रद्धा सुमन किताब लिखने वाले अमरेन्द्र ने कहा कि हनुमान से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उनका स्वामी के प्रति भक्ति भाव, नि:स्वार्थ सेवा, दुष्कर लक्ष्यों को आसानी से हासिल करना और किसी काम का श्रेय न लेना अनुकरणीय है। वर्तमान संदर्भ में इन गुणों का अनुकरण करके कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरियों से लेकर मल्टीनेशनल कं पनी में भी सफल हो सकता है।

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