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जबलपुर। उत्तर भारत में पंजाब सहित कई इलाकों में धूमधाम से मनाए जाने वाले बैसाखी पर्व का जश्न शहर में मनाने की तैयारी हो गई है। यहां के पंजाबी समुदाय के लोगों द्वारा इस पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाने की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय लोग बिल्कुल पंजाब की तरह ढोल-नगाड़ों के साथ नए वर्ष का जश्न मनाते है। फिर किसानों की पकी हुई फसल काटने का जश्न भी पूरे धमधड़ाके के साथ होता है। इस वर्ष बैसाखी शनिवार को है और इसके जश्न के लिए अभी से शहर का पंजाबी समुदाय तैयार है।
शुभ समय और मुहूर्त
बैसाख संक्रांति में सूर्य मेष राशि में सुबह 8.10 पर प्रवेश करेंगे।
बैसाख संक्रांति 14 अप्रैल, 2018 को 8.45 पर मुहूर्त होगी।
संक्रान्ति पर स्नान दान का पुण्य़काल दोपहर 14:34 तक चलेगा।
भांगड़ा और गिदा
बैसाखी के मौके पर शहर के सिख समुदाय के परिवार गुरुद्वारे जाते है। इसके लिए कई परिवार एक साथ एक जगह पर एकत्रित होकर पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिदा करते है। इस दिन लोग एक-दूसरे को नए साल की बधाई देने के लिए भी जाते है। सिख परिवारों में पारंपरिक पंजाबी पकवान बनाए जाते है।
इसलिए भी इस दिन का महत्व
बैसाखी सिखों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह इसलिए भी है क्योंकि बैसाखी के ही दिन 13 अप्रैल, 1699 को 10वें सिख गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस पंथ की स्थापना का लक्ष्य धर्म और नेकी के आदर्श के लिए सदैव तत्पर रहना था। इस दिन का सिख नए साल की शुरुआत के रुप में भी मनाते है।
इन वस्तुओं का करें दान
बैसाखी के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान से पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन अन्न, फल, वस्त्र और घटदान की परंपरा है। मौसम के परिवर्तन के साथ इस दिन से ग्रीष्मकाल का आरंभ होता है। इसलिए शरीर को तर रखने वाली वस्तुओं के दान का काफी महत्व होता है। हालांकि पूरे बैसाख माह में दान-पुण्य पर विशेष फल-प्राप्ति का योग माना जाता हैं। ऐसा करने से यह विधान करने वाले व्यक्ति के जीवन से रोग-शोक दूर होते है। आरोग्य, धन, सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
Published on:
13 Apr 2018 08:14 pm
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