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अजब-गजब: इस रेखा के कारण 300 वर्षों से हवा में टिकी है ये अनूठी चट्टान

300 वर्षों से टिकी है बैलेंसिंग रॉक

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balancing rock of india

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जबलपुर . शहर का बैलेन्सिंग रॉक विश्व प्रसिद्ध है। अक्सर यहां आने वालों के लिए यह कौतूहल का विषय रहता है कि आखिर इतने वर्षों से यह शिला एक ही दिशा में कैसे टिकी हुई है। मदन महल की ग्रेनाइट पहाडि़यों पर करीब ५०० टन वजन की अंडाकार रूप की दूसरी शिला ढाई डिग्री कोण पर झुकी हुई है, जिसका वर्ग क्षेत्र मात्र ९४.४ ही है। इस हैरतअंगेज रहष्य पर से अब शहर के ही एक विद्वान प्रोफेसर ने अपने शोध के माध्यम से पर्दा हटाया है।

शिला के रोचक महत्व को समझाने के लिए शहर के रिटायर्ड प्रो. केके सेठ ने शोध कार्य किया है। बैलेन्सिंग रॉक के बारे में उन्होंने बताया कि बैलेन्सिंग रॉक का केन्द्र अक्ष रेखा होने के कारण वह सबसे कठोर हिस्सा बन चुका है। ३०० वर्षों से एक ही दिशा में स्थिर होने के कारण भौतिक ऋतुक्षरण की क्रिया दो खण्डों में विभाजित होकर इस रूप में आई है। केके सेठ ने बताया कि वे अपने ज्ञान को लोगों के बीच बांटना चाहते हैं, ताकि जबलपुर से जुड़ी जानकारी युवाओं मिल सके। हाल ही में उनके शोध कार्य को इंटैक जबलपुर ने बुक के रूप में प्रकाशित किया है।

और ख्याति मिलने की संभावना
बैलेंसिंग राक प्रकृति का अजूबा है, इसे देखने-सुननेवालों के लिए यह हमेशा अनसुलझा रहष्य रहा है। पहाडिय़ों पर एक चट्टान पर दूसरी चट्टान मात्र जरा से हिस्से पर टिकी हुई है पर कितनी भी कोशिश कर लें यह टस से मस नहीं होती। सालों से यह चट्टान ऐसी ही बैलेंस बनाए हुए हैं, जरा भी नहीं हिलती है। इतना ही नहीं जबलपुर में जब जबर्दस्त भूकंप आया था, सैंकड़ों बड़ी-बड़ी मजबूत बिल्डिंगें क्षणभर में धराशायी हो गई थीं तब भी यह चट्टान हिली तक नहीं थी। अब प्रोफेसर सेठ के शोध के बाद इसे और ख्याति मिलने की संभावना बढ़ गई हे।