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महिला ने बिना नक्शे के बनवा दिया यह विश्व प्रसिद्ध भव्य मंदिर

- 17 साल में तैयार हुआ 225 फीट ऊंचा भव्य मंदिर

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tripur sundri mandir shridham

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जबलपुर। जबलपुर-इटारसी रेलवे ट्रेक पर श्रीधाम रेलवे स्टेशन से करीब 15 किमी की दूरी पर परमहंसी आश्रम झोतेश्वर स्थित है। जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की तपोस्थली के रूप में जाना जाता यह आश्रम प्रकृति की मनोरम छठा के बीच बना है। यहां अनेक दर्शनीय स्थल हैं, कई मंदिर भी बने हैं। आश्रम परिसर में लोधेश्वर मंदिर, हनुमान टेकरी, विचार शिला एवं स्फटिक से निर्मित शिवलिंग भी हैं लेकिन यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है- माता त्रिपुर सुंदरी का मंदिर। त्रिपुर सुंदरी माई के इस मंदिर का धार्मिक और तांत्रिक साधना के रूप में तो महत्व है ही , यह मंदिर भी कई मायनों में अनूठा और अद्वितीय है।


मुस्लिम महिला ने बनवा दिया भव्य मंदिर
यह भव्य मंदिर करीब 225 फीट ऊंचा है। सन 1965 में इसका निर्माण कार्य शुरु हुआ था और पूरे १७ साल में यह बनकर तैयार हुआ। मंदिर में सन 1985 में देव मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। मंदिर के साथ एक अनूठा संयोग जुड़ा हुआ है। शंकराचार्य के सहयोगी और पीठ पंडित शास्त्री रविशंकर द्विवेदी के मुताबिक इस मंदिर के निर्माण में एक मुस्लिम महिला का सबसे बड़ा योगदान है। इस महिला के पति कारीगर कासिम दीवाना ने राजस्थान से आकर यहां मंदिर निर्माण की शुरुआत की थी। कारीगर कासिम ने अपनी पत्नी के मार्गदर्शन में यह मंदिर बनाया। उसकी पत्नी उसे जो-जो सुझाव देती थी उसी के अनुरूप वह निर्माण करता जाता था। इस मंदिर का कोई नक्शा भी नहीं बनाया गया था। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस ग्रामीण औरत को इंजीनियरिंग का जरा भी ज्ञान नहीं था फिर भी यह भव्य और आकर्षक मंदिर तैयार कर लिया गया। शिखर की 47 फीट तक की दीवार कासिम की पत्नी की निगरानी में ही बनी थी।


हैं दुर्लभ मूर्तियां
विशाल मंदिर में माता त्रिपुर सुंदरी की दुर्लभ प्रतिमा प्रतिष्ठित हंैं। यहां गणेशजी की भी एक दुर्लभ मूर्ति है। यह एक दसभुजी प्रतिमा हैं जिसमें गणेशजी की गोद में शक्ति का वास दिखाया गया है। मंदिर में माई की सेनापति वाराही, मातंगी सहित अन्य देवियों की भी मूर्तियां स्थापित हैं। यहां कुल 85 मूर्तियां स्थापित की गई हैं जिनमें आदि गुरु ? शंकराचार्य की भी मूर्ति शामिल है। परमहंसी आश्रम परिसर में सिद्धेश्वर मंदिर को विशेष सिद्ध स्थान माना जाता है।