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GOLD पर भारी गिलट के गहने, ये है आदिवासी महिलाओं का FASHION

आदिवासी महिलओं के गहने देखते ही बनते हैं। कम सुविधाओं में ये खुद को बखूबी सजा व संवार लेती हैं।

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Abha Sen

Jul 11, 2016

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जबलपुर। आमतौर पर आदिवासियों को गरीब माना जाता है। जिसकी वजह से अनेक आदिवासी कम वस्त्रों का धारण करते हैं। लेकिन आदिवासी महिलाएं गहनों के मामले में पीछे नही हैं। जिन्हें आज के दौर में न्यू ट्रेंड और फैशन कहकर मार्केट में उतारा जाता है। दरअसल, आदिवासी महिलाएं उसे बरसों से धारण करती आ रही हैं। हालांकि गरीबी के चलते ये सोने या चांदी के तो नही होते, लेकिन पीतल, तांबा और गिलट बहुतायत देखने मिल जाता है। वह भी एक से बढ़कर एक सुंदर कारीगरी के साथ।

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गोंड़ आदिवासियों में महिलाएं मूंगा और नकली मोतियों के बने आभूषण धारण करती हैं। ये एल्यूमीनियम की बालियां भी पहनती हैं। गोंड़ युवतियों में मुख, हाथ व जांघ गुदाने का प्रचलन है।

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भाडिय़ा महिलाएं अपने गले में सफेद मोती के गुच्छे और पीतल या लोहे की कडिय़ों को पहनती हैं। गोंड़ युवतियां सफेद बांस के कंघों को अपने बालों को सजाने के लिए इस्तेमाल करती हैं। ये देखने में अत्यधिक आकर्षक लगते हैं। बैगा महिलाएं पैरों को सजाने के लिए घुंघरू व चुटकी पहनती हैं। कई बार ये कांच की चूडियां भी खुद को सजाने के लिए धारण करती हैं।


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आदिवासी गले में हंसली, कण्ठी, लटकनियां, छूटा, हयकल, बन्धन हार, तागली, साकली मुरकी, कान में बाली, झुमके और कर्णफ़ूल, हाथों में चूड़ा, कंगना, बाकुड़ा, हाड़का, काकन, कड़ी कंगना, गजरिया, एठी, गेंदे , गेंदे गजरे, लाख चूड़ा , पैर में तोडड, गुजरी, तोड़ा, पैनजा, पायल, कामी, कड़े, तोड़ा, पैरी आदि आभूषणों का चलन देखा गया है। इन आभूषणों की पच्चीकारी और नाक्काशी देखकर कारीगर के हुनर की दाद देना पड़ती है।

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