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जबलपुर। स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को संस्कारवान और सभ्य माना जाता है। किंतु समय के साथ यह बात बदलती जा रही है। स्कूल शिक्षक ऐसे काम कर देते हैं जो उनके लिए उचित नहीं होते, बल्कि उनसे पढऩे वाले बच्चों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे शिक्षकों को दंड देना ही एकमात्र उपाय रह जाता है ताकि समाज में अन्य शिक्षकों के प्रति दुर्भावना या गंदे विचार न आने पाएं। मप्र हाईकोर्ट ने एक ऐसे ही मामले में आरोपी शिक्षक को एक साल की सजा और आर्थिक दंड दिया है। उक्त आरोपी शिक्षक पर एक चूड़ी बेचने वाली महिला से छेड़छाड़ करने का आरोप है।
about-
- चूडी़ बेचने वाली को मिला न्याय
- हाईकोर्ट ने दी छेड़छाड़़ करने वाले मास्टर को एक साल की सजा
- छतरपुर जिले का मामला
- निचली अदालत ने किया था आरोपी को बरी
ये है मामला
मप्र हाईकोर्ट से छतरपुर जिला निवासी चूड़ी बेच कर उदरपोषण करने वाली महिला को न्याय मिला है। जस्टिस एसके पालो ने उसकी अपील स्वीकार करते हुए उससे छेड़छाड़़ करने वाले मास्टर को एक वर्ष सश्रम कारावास व एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें आरोपी को बरी कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता चंदला निवासी सुमनलता लखेरा की ओर से अपील दायर कर प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी छतरपुर के 27 अप्रैल 2017 के फैसले को चुनौती दी गई थी। अपील में कहा गया कि गांव का ही मास्टर विनोद कुमार बरार झाडफ़ूंक के लिए उसके घर आता था। 27 मार्च 2017 को सुबह जब वह झाडू़ लगा रही थी, तभी विनोद ने उसका हाथ पकड़ कर बुरी नीयत से खींचा। शोर मचाने पर भाग गया। पुलिस ने भादंवि की धारा 354 के तहत अपराध दर्ज किया था। लेकिन जिला अदालत ने महज एक माह की सुनवाई के बाद 27 अप्रैल 2017 को आरोपी को बरी कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा ने बताया कि सभी साक्ष्य पीडि़ता के समर्थन में होने के बावजूद निचली कोर्ट ने यह निर्णय दिया, जो अनुचित है। तर्क स्वीकर कर कोर्ट ने आरोपी को एक माह के अंदर विचारण कोर्ट में सरेंडर करे। न करने की सूरत में अदालत समुचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
Published on:
10 May 2018 12:47 pm
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