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कैंसर से जंग के पहले ‘स्पर्म-एग’ फ्रीज करा रहे मरीज, हो सकता है ‘बांझपन’

MP News: विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के उपचार, जैसे कि कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी, अंडाशय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और बांझपन का कारण बन सकते हैं।

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(फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

(फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

MP News: कैंसर से पीड़ित युवतियां व महिलाएं मां बनने के सपने को जीवित रखने अपने एग फ्रीज करा रही हैं। जिससे कैंसर के इलाज के दौरान उनके एग की गुणवत्ता पर पडऩे वाले असर से पहले ही उन्हें सुरक्षित बचा सके। इसी तरह से कैंसर पीड़ित पुरुष भी अपने स्पर्म र्फ्रीज करा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार स्टेट कैंसर अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों में से हर साल 5-6 मरीज निजी फर्टीलिटी सेंटर में अपने एग अथवा स्पर्म फ्रीज करा रहे हैं। शहर में कई सेंटर्स में यह सुविधा उपलब्ध है।

प्रजनन क्षमता हो सकती है प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के उपचार, जैसे कि कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी, अंडाशय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और बांझपन का कारण बन सकते हैं। ऐसे में स्पर्म अथवा एग फ्रीज कराने की सुविधा कारगर साबित हो सकती है।

चुनौतियां भी शामिल

एग फ्रीजिंग की सफलता दर कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें महिला की उम्र और अंडों की गुणवत्ता शामिल है। युवा महिलाओं में फ्रीजिंग की सफलता दर अधिक है।

एग फ्रीजिंग के लाभ

-कैंसर पीड़ित महिलाओं को भविष्य में मां बनने का विकल्प प्रदान करता है।

-कैंसर उपचार के प्रभाव से अंडों को बचाने में मदद करता है।

यह है स्थिति

-10 के लगभग सेंटर हैं जबलपुर में जहां एग या स्पर्म फ्रीजिंग की सुविधा

-1.50 लाख के लगभग खर्च

-5 साल तक लगभग एग, स्पर्म रहते हैं सुरक्षित

30 साल की उम्र तक एग की गुणवत्ता मानी जाती है अच्छी

5-6 मरीज साल में चुनते हैं इस सुविधा का विकल्प

कैंसर के इलाज के दौरान पीड़ित के एग या स्पर्म की गुणवत्ता खराब हो सकती है। एससीआई आने वाले मरीजों में से 5-6 मरीज हर साल अपने एग अथवा स्पर्म फ्रीज करा रहे हैं।- डॉ.राजेश जैन, कैंसर रोग विशेषज्ञ, स्टेट कैंसर अस्पताल