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मन के विकार दूर करती है भागवत कथा

लघुकाशी वृन्दावन धाम पचमठा में श्रीमद् भागवत कथा

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bhagvat katha

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जबलपुर. जीवन को सद्मार्ग के लिए श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण और धर्मज्ञान को आत्मसात करना ही एक मात्र विकल्प है। यह कथा मन के विकारों को दूर करती है। आस्तिक बनाती है। परमात्मा से लगन ही मनुष्य के विकारों का उद्देश्य होना चाहिए। भागवत कथा इसी उद्देश्य को पूर्ण करती है। लघुकाशी वृन्दावन धाम पचमठा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बुधवार को स्वामी गिरीशानंद ने ये उद्गार व्यक्त किए। कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा कर्म और भाग्य दोनों को बदलने का सार्थक मार्ग है। यजमान डॉ. कृष्णकांत चतुर्वेदी, कमलेश बसेडि़या, नितिन बसेडि़या ने व्यास पूजन किया।

जन्म से उत्पन्न होती है तृष्णा
निवृत्त शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद ने कहा कि तृष्णा व्यक्ति के जन्म के साथ उत्पन्न होती है। तृष्णा को पूर्ण करने को हम कर्म में लग जाते हैं और तृष्णाओं का एक ही सूत्र विंदु होता है आनंद प्राप्ति। लक्ष्मी और सरस्वती रहें लेकिन हम भूल जाते हैं कि ये शक्तियां भी आनंद कंद प्रभु की ही शक्तियां हैं। डॉ. पवन स्थापक, अनुपमा स्थापक, अनुराग खरे व राजेश प्रवीण पाठक मौजूद थे।

सत्य कभी पराजित नहीं होता
जबलपुर. सत्य के पथ पर चलते हुए कठिनाईयां आती हैं परंतु विजय सत्य की ही होती है। उक्त उद्गार शास्त्रीनगर में बुधवार को श्रीरामकथा में कथा व्यास स्वामी राजेश्वरानंद ने कही। उन्होंने श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग का वर्णन किया। इस अवसर पर शोभायात्रा भी निकली। भगवान की झांकियों पर पुष्पवर्षा कर श्रीराम कथा का समापन हुआ। रामलीला मंडली ने मंचन किया। आयोजक प्रमोद तिवारी, उमा तिवारी, रोहित तिवारी, विधायक तरूण भनोत, पूर्व मंत्री चंद्रकुमार भनोत, रंजीत पटेल, संजय यादव, जगत बहादुर अन्नू, रजनीश जैन, आशीष ठाकुर थे।

गुरु-शिष्य का संपर्क आध्यात्मिक
जबलपुर.गुरु शिष्य का संपर्क जन्म जन्मांतर का होता है। गुरु और शिष्य अध्यात्मिकता से जुड़े होने के कारण हमेशा का भगवत प्राप्ति में सहायक होता है। समन्वय सेवा केन्द्र छोटीलाइन मंें दिव्यांगजनों को कपड़े वितरण करने के मामले में बुधवार शाम निवृत्त शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने ये उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने सुख और दु:ख पर चर्चा करते हुए कहा कि मानव जीवन में सुख और दु:ख निरंतर आते हैं। सुख तो व्यक्ति सहर्ष भोग लेता है। लेकिन, दु:ख के क्षणों में व्यक्ति कुंठित हो जाते हैं। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, स्वामी परिपूर्णानंद, आचार्य डॉ.कृष्णंकांत चतुर्वेदी, विधायक एलबी लोबो एवं जितेन्द्र जामदार मौजूद थे।