
छिंदवाड़ा. श्रद्धानगर परासिया रोड पर चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन सोमवार को पंडित रामविशाल शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि वासना आंख से अंदर जाती है अत: आंख को बिगडऩे नहीं देना चाहिए। जब पूतना आती है तो श्रीकृष्ण आंख बंद कर लेते हैं। कथा में भगवान ने राक्षस का वधकर सन्देश दिया कि जीवन में भगवान मुख्य हैं। जिन्हें जीवन की गाड़ी में ऊपर रखना चाहिए। माखन चोरी के वृतान्त का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि मंत्र का प्रयोग करते हुए जीव को श्रीकृष्ण से ही प्रेम करना चाहिए और संसार में रहते हुए भी संसार के नहीं रहना चाहिए। उन्होंने गोवर्धन लीला कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान सजीव झांकी भी सजाई गई। कथा का श्रवण करने काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
हमेशा वेद, पुराण के दिखाए रास्ते पर चलें
छिंदवाड़ा. गुलाबरा लेबर कोर्ट गली में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा के चौथे दिन सोमवार को पंडित जितेन्द्र महाराज ने मनु महाराज के दो पुत्रों की कथा विस्तार से सुनाई। उन्होंने कहा कि मनु महाराज के एक पुत्र का नाम उत्तानपाद था। जिसकी दो पत्नी थी। सनीति और सुरुची। सनीति का आश्रय अच्छी नीति जो वेद और पुराणों के आधार पर कार्य करें एवं सुरुची वो जो अपनी इच्छा से कार्य करे। भागवताचार्य ने कहा कि हम यदि वेद और पुराणों के दिखाए रास्ते पर चलें तो हमारे घर भी ध्रुव रूपी यश का जन्म होगा जो अचल और अनुपम होगा। उन्होंने आगे जड़ भरत की कथा सुनाई। नरको का वर्णन करते हुये अजामिल की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा का श्रवण करने काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
पति की आज्ञा का पालन करना परम धर्म: शास्त्री
छिंदवाड़ा. शिक्षक कॉलोनी में चल रही भागवत कथा में सोमवार को पंडित धर्मेश दुबे शास्त्री ने सती चरित्र, धु्रव चरित्र की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि हमेशा पत्नी को पति की आज्ञा माननी चाहिए। पति के हर बात पर विचार करना चाहिए। नारी जाति का परम धर्म है कि वह पति के हर आज्ञा का पालन करे। भागवताचार्य ने भागवत के महात्य के बारे में भी बताया। कहा कि भागवत कथा सुनते मात्र से ही सब दुख दूर हो जाते हैं। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Published on:
26 Dec 2017 11:44 am
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