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भागवत सुनने से जीवन में सद्गुणों का होता है उदय

पचमठा मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा

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bhagvat katha

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जबलपुर. श्रीमद् भागवत कथा भगवान की भक्ति के साथ जीवन में सद्गुणों को भी बढ़ाती है। भागवत कथा में ईश्वरीय लीला के माध्यम से हमारे हृदय में जो विचार आते हैं, हमें माया से निवृत्त कराने में सहायक होते हैं। लघु काशी पचमठा मंदिर गढ़ा में श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को साकेतधाम के संस्थापक स्वामी गिरीशानंद सरस्वती ने ये उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भागवत का ज्ञान ही जीवन का प्रमुख आधार है। जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भागवत कथा का श्रवण और इस अध्यात्म को अंतर्मन में आत्मसात करने की आवश्यकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में कुरुक्षेत्र में धर्नुधर अर्जुन को धर्म ज्ञान दिया। आज भी वो पूरी तरह प्रासंगिक है और जन्म जन्मांतर तक प्रसांगिक रहेगा। कथा में स्वामी मुक्तानंद पुरी, आचार्य डॉ. कृष्णकांत चतुर्वेदी, नितिन बसेडि़या, आरएन सिंह, सुशीला सिंह, नित्यरंजन खम्परिया, डॉ. पवन स्थापक एवं अनुराग खरे ने पूजन किया।

भक्ति की पूंजी बढ़ाओ दोनों लोक सुधर जाएंगे
पुलिस कॉलोनी गढ़ा में भागवत कथा
जबलपुर. भौतिक सत्ता, सुख को त्यागकर ब्रह्म अथवा भक्ति की पूंजी एकत्र करना चाहिए। भौतिक सुख लोक में आपके साथ है। ब्रह्म की पूंजी होगी तो लोक-परलोक दोनों सुधर जाएंगे। पुलिस कॉलोनी गढ़ा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को स्वामी रामप्रपन्नाचार्य ने ये उद्गार व्यक्त किए। कथा में संत ने गंगा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों के दर्शन का महत्व बताते हुए कहा कि दर्शन के लिए प्रात:काल या संध्या का समय सबसे बेहतर है। मां नर्मदा के आंचल को स्वच्छ रखने संस्कारधानी के भक्तों की जिम्मेदारी है। कथा में प्रभु संकीर्तन, भजन एवं नृत्य से हर कोई भाव विभोर हो गया। कथा में पार्षद केवल कृष्ण ? आहुजा, डॉ. अजय फौजदार, जवाहर पटेल, रामकरण मिश्रा, रामवती चौबे, विमल सोनी शामिल हुए।

इस्कॉन मंदिर में अतिथि निवास का भूमिपूजन
जबलपुर. निवृत्त शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने गुरुवार को चौकीताल लम्हेटाघाट स्थित निर्माणाधीन राधारमण मंदिर इस्कॉन में अतिथि निवास का भूमि पूजन किया। २१ वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के बीच पूजन कराया। स्वामी सत्यमित्रानंद ने संदेश दिया कि अपने ईष्ट के प्रति एकनिष्ठ श्रद्धा से भजन और ध्यान करना चाहिए। सुख से आनंद की यात्रा ही जीवन है। सुख प्राप्त करना आसान है। यह बाहरी है। जबकि, आनंद प्राप्त करना कठिन है। आनंद व्यक्ति के अंतर्मन का विषय है। इस्कॉन जबलपुर के चेयरमैन डॉ. कैलाश गुप्ता ने मंदिर के लिए एक करोड़ रुपए दान देने की घोषणा करते हुए प्रथम किश्त दस लाख रुपए दिए। समाजसेवी सुधीर रावत ने ५ लाख, सुधांशु परेता ने २.५ लाख व अजय खंडेलवाल ने २.५ लाख रुपए दान दिए। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, इस्कॉन के प्रमुख अदिति पुत्रदास, श्याम सुहाने, प्रवीण अग्रवाल, डॉ.सिद्धार्थ सिंह, डॉ.राजेश धीरावाणी, डॉ. अमलकांति सेन, गणेश पुरोहित मौजूद थे।