भोपाल मास्टर प्लान 2031: बाघों के जंगल को बना दिया रहवासी, ग्रीन बेल्ट के लिए घातक

हाइकोर्ट ने पूर्व डीजीपी अरुण गुर्टू की जनहित याचिका पर राज्य सरकार से पूछा

 

By: Lalit kostha

Published: 16 Sep 2020, 12:18 PM IST

जबलपुर। मप्र हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि राजधानी भोपाल के मास्टर प्लान 2031 पर कितनी आपत्तियां आईं, कितनों को सुनवाई का मौका दिया गया और आपत्तियों पर सुनवाई की प्रक्रिया क्या है? कोर्ट ने यह भी पूछा कि आबादी का सही आकलन किए बिना भोपाल मास्टर प्लान 2031 के मसौदे को हरी झंडी कैसे दे दी गई? चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस वीके शुक्ला की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। अगली सुनवाई 23 सितम्बर नियत की गई।

भोपाल मास्टर प्लान 2031 पर कितनी आपत्तियां आईं
कितनों को दिया सुनवाई का मौका, क्या है प्रक्रिया?

यह है मामला- भोपाल सिटीजन फोरम के पूर्व डीजीपी अरुण गुर्टू ने जनहित याचिका दायर की। वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ व अधिवक्ता रोहित जैन ने तर्क दिया कि टीएनसीपी संचालक ने 10 जुलाई 2020 को भोपाल का नया मास्टर प्लान 2031 अधिसूचित किया। इसको लेकर करीब 1700 आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। प्लान में पूरे ग्रीन बेल्ट को कमर्शियल किया जा रहा है। वन क्षेत्र जहां बाघों का कुनबा है, उसे आवासीय घोषित किया गया। प्लानिंग एरिया पहले के 600 वर्ग किमी की अपेक्षा बढ़ाकर करीब 1016 वर्ग किमी कर दी गई। इसमें भी 850 वर्ग किमी को विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित किया गया, जो आबादी के लिहाज से बहुत अधिक है। यह प्लानिंग 2031 में शहर की आबादी 36 लाख हो जाने का आकलन करते हुए की गई।

 

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ग्रीन बेल्ट के लिए घातक है प्लान-
प्लान के अनुसार 2031 तक शहर की आबादी महज 26 लाख होने का अनुमान है। इसके अलावा 70 प्रतिशत ग्रीन क्षेत्र कम कर दिया गया। बड़ी झील के कैचमेंट एरिया में बाघों का मूवमेंट होने के बावजूद यहां निर्माण की अनुमति दे दी गई। प्रति हेक्टेयर 42 लोगों के हिसाब से प्लानिंग होनी थी, लेकिन 100 व्यक्तिके हिसाब से की गई। यह प्लान शहर के पर्यावरण, वन्य जीवन, जलस्रोतों, ग्रीन बेल्ट के लिए घातक है।

नहीं हो सकती सबकी सुनवाई
मंगलवार को याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नागरथ ने कोर्ट को बताया कि मास्टर प्लान पर 1700 आपत्तियां आईं। कोरोनाकाल चरम पर होने के बावजूद सरकार मास्टर प्लान को लेकर जल्दबाजी कर रही है। इसके चलते सभी आपत्तियों की सुनवाई सम्भव नहीं है। इस पर कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव को सरकार की ओर से जवाब के लिए समय दे दिया।

वन मंत्रालय को भी नोटिस
याचिकाकर्ता की ओर से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भी पक्षकार बनाने का आवेदन किया गया। कोर्ट ने इसे मंजूर कर दोनों नए पक्षकारों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

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