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यहां शादी में दुल्हन पहनती है सफेद साड़ी, जानिए क्या है कारण

आम तौर पर आपने विधवा महिलाओं को सफेद वस्त्रों में देखा होगा, लेकिन एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुल्हन को सफेद कपड़ों में विदा किया जाता है, आप भी जानें

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neeraj mishra

Jul 22, 2016

chougan

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जबलपुर। आम तौर पर आपने विधवा महिलाओं को सफेद वस्त्रों में देखा होगा, लेकिन एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुल्हन को सफेद कपड़ों में विदा किया जाता है। मंडला जिले के रामनगर के पास स्थित चौगान की मढिय़ा आस्था का केन्द्र है। यह गौंड़ आदिवासियों के तीर्थ के रूप में विख्यात है। यहां विराजने वाली देवी को प्रसन्न करने के लिए भक्त श्वेत वस्त्र धारण करते हैं। वहीं यहां से जुड़ी आस्था के कारण ग्रामीण अपनी बेटी को भी सफेद साड़ी में विदा करते हैं।


इसलिए करते हैं सफेद कपड़ों का प्रयोग

चौगान की मढिय़ा के पंडा पूजन-पाठ के दौरान सफेद कपड़े पहनते हैं। यहां पहुंचने वाले भक्त भी सफेद कपड़ों में पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफेद रंग शांति का प्रतीक है। इसलिए इस कपड़े का प्रयोग करते हैं। सैकड़ों वर्षों से यहां लोग सफेद कपड़ों में ही पहुंचते हैं। पूर्व विधायक नारायण सिंह पट्टा का कहना है कि यह लोगों की आस्था का केन्द्र है। सफेद वस्त्र शुभ माने जाते हैं। इसलिए इनका प्रयोग वैवाहिक आयोजन में भी किया जाता है।

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चौगान की मढिय़ा प्रसिद्ध

चौगान की मढिय़ा गोंड आदिवासियों की आस्था का केन्द्र है। रामनवमीं के बाद विशेष मुहूर्त में यहां जवारे का विसर्जन किया जाता है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए अन्य प्रदेश से भी लोग आते हैं। मढिय़ा के बारे में यह कहा जाता है कि यहां मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है।


असाध्य रोगों को ठीक करने का दावा

चौगान की मढिय़ा में स्थानीय पंडा पूजा पाठ करते हैं। वे झाड़ फूंक से बीमारियों को ठीक करने का दावा करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मढिय़ा के प्रपाप के कारण कई मरीज ठीक हो जाते हैं। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि झाड़-फूंक से कोई भी मरीज ठीक नहीं होता। कई बार सामान्य रोगों में व्यक्ति ठीक हो जाता है।

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