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भाई की तलाश में बहनों ने पूरे शहर में हजारों पोस्टर लगा दिए, आँखे हर नजर में खोज रहीं

भाई की तलाश में बहनों ने पूरे शहर में हजारों पोस्टर लगा दिए, आँखे हर नजर में खोज रहीं

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Brothers - Sisters : भाई तुम कहां चले गए… आ जाओ हम सबको बहुत याद आती है। दो बहनों की यह करुण पुकार पोस्टर के माध्यम से बस-टे्रन से लेकर हर सार्वजनिक स्थान में गूंज रही है। लेकिन डेढ़ माह हो गए हैं, उनके भाई का कुछ पता नहीं लगा है। लेकिन बहनें हार मानने को तैयार नहीं हैं। हर दिन उनका पोस्टर लगाने और हर संभावित स्थान पर तलाश करने में बीत रहा है। उन्हें उम्मीद है कि भाई एक दिन लौट आएगा।

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Brothers - Sisters : हर जगह गुहार

भाई की तलाश में जुटी शिवानी और रागिनी कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहती हैं। भेड़ाघाट थाना में 20 जुलाई को ही गुमशुदगी दर्ज करा दी गई थी। उस थाने से लेकर एसपी ऑफिस तक बहनें लगातार संपर्क में रहती हैं। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने भाई को तलाशने की गुहार लगाई। लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। दोनों ही बहनें हिम्मत नहीं हार रही हैं।

Brothers - Sisters : रुला देने वाली कहानी

रुला देने वाली यह कहानी है नयागांव के चौधरी परिवार की। जिसके इकलौते बेटे उज्ज्वल चौधरी (27) का 20 जुलाई के बाद से कोई पता नहीं चल रहा है। पिता राजेश चौधरी ने पुलिस थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, तलाश की लेकिन अभी तक नाकामी ही मिली है। इस अप्रत्याशित वाकये ने परिवार को तोडकऱ रख दिया है। इसी दौरान आया रक्षाबंधन त्यौहार तो बहनों शिवानी और रागिनी को लगा कि भाई लौट आएगा। देर रात तक इंतजार के बाद भी जब भाई नहीं आया तो उसकी तलाश कर घर लाने की ठान ली।

Brothers - Sisters : हर सुबह उम्मीद

रक्षाबंधन के बाद से शिवानी और रागिनी का बस एक ही काम है, वे पोस्टर लेकर निकलती हैं और दीवारों व सार्वजनिक जगहों में मार्मिक अपील के पोस्टर चस्पा करती हैं। जबलपुर भर ही नहीं बल्कि कटनी, नरसिंहपुर, मंडला सहित अन्य जिलों में भी जाकर पोस्टर लगाए। वे अपने साथ रक्षा सूत्र यह सोचकर लेकर चलती हैं कि पता नहीं भाई कहां पर मिल जाए और वे उसे रक्षा सूत्र बांधकर गले लगकर जमकर रो लें। हर सुबह उनकी इसी उम्मीद के साथ होती है। रात तक निराशा ही हाथ चाहे भले लगती हो पर नाउम्मीद बिल्कुल नहीं हैं।

Brothers - Sisters : छोटी सी चूक का बड़ा दर्द

परिवार को एक छोटी सी चूक की बड़ी टीस है। दरअसल, उज्ज्वल ने 2023 में जीसीएफ की भर्ती परीक्षा पास की थी और कॉल लेटर आया था। पर उसने ज्वाइन नहीं किया। कोशिश दूसरी सरकारी नौकरी के लिए प्रयास करने की थी। लेकिन उसके बाद से वह गुमशुम रहने लगा। परिवार उसे सहारा देने में लगा हुआ था पर वह उबर नहीं पा रहा था। 20 जुलाई को मोपेड लेकर भेड़ाघाट गया। स्टैंड में मोपेड खड़ा कर धुआंधार वॉटरफाल के खतरनाक प्वॉइंट की ओर बढऩे लगा तो पुलिसकर्मियों की नजर उस पर पड़ गई। उसे रोका और परिवार को सूचना दी। पिता और दोनों बहने भेड़ाघाट पहुंच गईं। वहां से पिता साथ में बेटे को लेकर बस से घर के लिए निकले और मोपेड बहनों ने ले लिया। इसी दौरान उज्ज्वल ने पानी खरीदने के बहाने एक दुकान की ओर गया और फिर ओझल हो गया।