
पावरलूम
जबलपुर। पावरलूम का प्रशिक्षण, प्रमाण-पत्र और कपड़ों की गुणवत्ता की जांच सहित कई अन्य सुविधाओं वाला पावरलूम सर्विस सेंटर करीब छह महीने से बंद है। केंद्र सरकार ने इसका बजट बंद कर दिया है। इससे पावरलूम संचालकों को तकनीकी सहायता, पारंगत कारीगर और सरकार की योजना के क्रियान्वयन सम्बंधी समस्या होने लगी है। यह प्रदेश में उद्योग विभाग की ओर से संचालित एकमात्र सेंटर है। शासन से पत्राचार चल रहा है कि मदद नहीं मिलने पर यह हमेशा के लिए बंद हो सकता है। जबलपुर के गोहलपुर क्षेत्र में करीब 20 साल पहले भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय ने पावरलूम सेवा केंद्र (पावरलूम सर्विस सेंटर) स्थापित किया था। इसका संचालन प्रदेश शासन के सहयोग से किया जाता है। केंद्र सरकार की ओर से हल साल करीब 12 लाख रुपए बजट मुहैया कराया जाता है। अब यह बंद हो गया है। बताया गया कि सरकार की ओर से कहा गया है कि यहां एक अधिकारी की नियुक्ति के साथ यह लाभदायक नहीं है। यदि प्रदेश शासन अपने खर्चे पर संचालन कर सकता है तो करे। ऐसे में गेंद राज्य शासन के पाले में आ गई है। सेंटर की ओर से बजट मांगा जा रहा है।
जिले में 300 पावरलूम
जिले में करीब 300 पावरलूम का संचालन हो रहा है। इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 500 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यहां पर परम्परागत रूप से हथकरघा, कारपेट लूम, पावरलूम, कसीदाकारी और रेडीमेड गारमेंट जैसे सलवार-सूट, जींस पेंट, कुर्ती, लोवर, शर्ट आदि गारमेंट बनाने वाले कारीगर हैं। इस लिहाज से सर्विस सेंटर काम का है। बताया गया कि यहां छह पद स्वीकृत हैं। लेकिन, केवल दो ही पद भरे हैं। जरूरत पडऩे पर आउटसोर्स के जरिए विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। ऐसे में उन्हें रोजगार मिलना बंद हो गया है। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से देशभर में 44 पावरलूम सेवा केंद्र (पावरलूम सर्विस सेंटर) खोले गए थे। इसमें जबलपुर का केंद्र भी शामिल था। इनमें से 26 केंद्रों का संचालन विभिन्न टैक्सटाइल्स रिसर्च संगठन जैसे लिट्रा, सिट्रा, अतीरा, विट्रा आदि द्वारा किया जाता है। छह केंद्रों का संचालन प्रदेश सरकारों द्वारा किया जाता है। जबलपुर स्थित केंद्र का संचालन प्रदेश के एमएसएमइ विभाग द्वारा हो रहा है।
सेंटर के काम
- हथकरघा के लिए नए श्रमिकों को प्रशिक्षण देना
- कारखानों में कार्य के लिए प्रमाण पत्र प्रदान करना
- पावरलूम इकाइयों को नई तकनीक से अवगत कराना
- क्षेत्र के पावरलूम बुनकरों का समूह बीमा करवाना
- सम्भाग में पावरलूम गतिविधियां बढ़ाने में सहायता करना
- टैक्सटाइल्स सम्बंधी सरकार की नीतियों का क्रियान्वयन
टेस्टिंग लैब है, पर अपग्रेड नहीं
सर्विस सेंटर में एक टेस्टिंग लैब है। वह भी बंद हो गई है। इसमें धागे और कपड़े की गुणवत्ता जांचने की सुविधाएं हैं। इसे भी समय के अनुरूप अपग्रेड नहीं किया गया, वरना इससे बड़ा राजस्व प्राप्त हो सकता है। शासकीय विभागों में कपड़े की सप्लाई से पहले गुणवत्ता की जांच जरूरी है। लैब का प्रमाण पत्र भी जरूरी होता है। शहर के व्यापारी या रेडीमेड गारमेंट निर्माताओं को इस काम के लिए अभी बुरहानपुर या इंदौर जाना पड़ता है।
पावरलूम सर्विस सेंटर के पुन: संचालन के लिए शासन को पत्र लिखा है। इसमें सेंटर की उपलब्धियों और भविष्य की सम्भावनाओं का भी उल्लेख किया गया है। निर्देश के अनुसार आगे कार्य किया जाएगा।
एसके दुबे, प्रभारी पावरलूम सर्विस सेंटर
सर्विस सेंटर के लिए कहा गया कि लाभदायक नहीं है। यह सरकार की सही नीति नहीं है। सेंटर बंद होने से पावरलूम संचालकों को कई तरह के नुकसान हो रहे हैं। यदि शासन अनुमति देता है तो इसे पीपीपी मोड पर चला सकते हैं।
अशफाक अहमद अंसारी, चेयरमैन, जबलपुर पावरलूम क्लॉथ मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन
Published on:
20 Feb 2022 08:20 pm
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