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नही सुनाई देती निमंत्रण की मीठी मनुहार,हल्दी- पीले चावल की जगह अब डिजिटल कार्ड

बदलते तकनीकी दौर में विवाह के लिए आमंत्रित करने का परम्परागत तरीका भी खासा बदला है। अब विवाह का निमंत्रण देने आए स्वजन, प्रियजन की मीठी मनुहार नहीं सुनाई देती, और ना ही उनके हाथों में पीले चावल या हल्दी नजर आती। तकनीक में बदलाव व युवाओं की कागज बचाने की सोच के चलते आकर्षक व बोलते निमंत्रण पत्रों के बाद अब डिजिटल निमंत्रण पत्रों ने शहर में वैवाहिक निमंत्रण के इन परम्परागत तरीकों की जगह ले ली है।

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वैवाहिक निमंत्रण के परम्परागत तौर तरीकों में आया बदलाव, एक क्लिक में पहुंच रहा निमंत्रण

जबलपुर।
बदलते तकनीकी दौर में विवाह के लिए आमंत्रित करने का परम्परागत तरीका भी खासा बदला है। अब विवाह का निमंत्रण देने आए स्वजन, प्रियजन की मीठी मनुहार नहीं सुनाई देती, और ना ही उनके हाथों में पीले चावल या हल्दी नजर आती। तकनीक में बदलाव व युवाओं की कागज बचाने की सोच के चलते आकर्षक व बोलते निमंत्रण पत्रों के बाद अब डिजिटल निमंत्रण पत्रों ने शहर में वैवाहिक निमंत्रण के इन परम्परागत तरीकों की जगह ले ली है। कम्प्यूटर या मोबाइल पर एक क्लिक के साथ अगले व्यक्ति तक पहुंच जाने वाले ये कार्ड भी कई तरीकों और थ्री डी तक में आ रहे हैं, और लोग इन्हें पसन्द भी कर रहे हैं।


एक कार्ड सबको फॉरवर्ड-
वैवाहिक फोटोग्राफी व डिजिटल कार्ड के कार्य से जुड़े आशीष साहा कहते हैं कि आज से 40-50 साल पहले शादी के कार्ड छपवाने का अधिक चलन नहीं था। सिर्फ पीली चिठ्ठी होती थी। पड़ोस से लेकर रिश्‍तेदारों को लड़के की बारात का निमंत्रण देना होता था, तो बुलावे के साथ सुपारी दी जाती थी। अगर लड़की की शादी का निमंत्रण देना होता था , तो पीले चावल भेजे जाते थे। धीरे-धीरे निमंत्रण पत्र आए।एक समय ऐसा आया कि 3 रुपये की कीमत से लेकर 300 रुपये तक के कार्ड छपवाए जाते थे। लेकिन कागज के निमंत्रण पत्र का प्रचलन अब खत्‍म होता दिखाई दे रहा है। अब डिजिटल कार्ड बन रहे हैं। एक कार्ड व्‍हाट्सएप के माध्‍यम से सबको फॉरवर्ड कर दिया जाता है। वहीं कुछ लोग 5 या 11 कार्ड छपवाते हैं, फिर उनके फोटो रिश्‍तेदारों को भेजते हैं।

फोन कॉल भी अहम-
अब बुलावे का प्रमुख तरीका फोन कॉल हो गया है। अधिवक्ता ब्रह्मानन्द पांडे कहते हैं कि आज के व्यस्त दौर में हर व्यक्ति 24 घण्टे अपने कार्यालय या घर मे रहे, यह सम्भव नही है। कभी कभी निमंत्रण कार्ड घर, दफ्तर पहुंचने के बावजूद नही मिल पाते। ऐसे में विवाह की सूचना के लिए फोन कॉल जरूरी हो गया है। विवाह के डिजिटल कार्ड के साथ आजकल फोन जरूर किया जाता है।

नए-नए डिजिटल कार्ड की डिमांड-
समय के साथ साथ बाजार डिजिटल कार्ड भी नए-नए तरीकों के आ रहे है। विभिन्न तरीकों की डिजाइनों के डिजिटल कार्ड बाजार में मौजूद है। पहले डिजिटल कार्ड केवल पीडीएफ या इमेज में आते थे। वहीं अब नए तरीकों के वीडियो में यह कार्ड बन रहे है। इससे जुड़े लोगों का कहना है कि बाजार में इन नए फॉरमेट के डिजिटल वीडियो कार्ड की अधिक डिमांड है। इसके चलते मार्केट में ग्राफिक डिजाइनरों की मांग भी खूब है।आजकल थ्री डी डिजिटल निमंत्रण कार्ड भी बन रहे हैं।
दुकनदारों का कहना है कि सभी डिजिटल कार्ड के अलग-अलग रेट हैं । जैसी डिजाइन है, वैसे ही इनके दाम है। इमेज डिजिटल कार्ड से लेकर डिजिटल वीडियो कार्ड व थ्री डी वीडियो डिजिटल कार्ड की लागत 500 रु से 10000 रु तक आती है।
क्यूआर कोड से मिलती है जानकारी-
डिजिटल कार्ड के साथ ही कागज के निमंत्रण पत्रों में भी अब विवाह समारोह से जुड़ी जानकारियों के लिए अलग अलग क्यूआर कोड प्रदर्शित किए जा रहे हैं। ये क्यूआर कोड वैवाहिक जानकारी के सामने या नीचे प्रदर्शित होते हैं। इन्हें मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैनर के जरिए स्कैन करने पर विवाह स्थल की लोकेशन, प्री वेडिंग शूट वीडियोज , विवाह कार्यक्रम के वीडियोज तथा फ़ोटो देखे जा सकते हैं। इनकी वजह से मेहमानों को खासी सुविधा होने लगी है।

कोरोनाकाल के बाद बढ़ा चलन-
कोरोना काल के बाद से लोग निमंत्रण कार्ड छपवाने के साथ उसकी डिजिटल कॉपी जरूर तैयार करवाते है। कार्ड भले ही पहुंचे या नहीं , लेकिन हर मेहमान तक डिजिटल कार्ड जरूर पहुंचाया जाता है। इसके लिए बकायदा मेहमानों की सूची के साथ उनके मोबाइल नम्बर की सूची भी बनने लगी है। जिससे सोशल मीडिया की मदद से डिजिटल कार्ड भेजा जा सके। यह कार्ड फोटो फोर्मेट के साथ वीडियो फोर्मेट में बनाए जाते है। प्रिंट कार्ड से भी ज्यादा खर्च लोग अब डिजिटल कार्ड डिजाइन कराने पर करने लगे है।