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13 साल के बच्चे को हुआ एनल कैंसर, डॉक्टर्स भी हैरान

मेडिकल अस्पताल में पहला मामला: सर्जरी पर किया जा रहा विचार

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Cancer

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जबलपुर। कम उम्र में एनल (गुदा) कैंसर के मामले आमतौर पर कम आते हैं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में 13 वर्ष के बच्चे को गुदा कैंसर होने का मामला सामने आया है। इतनी कम उम्र में बच्चे के गुदा कैंसर से पीडि़त पाकर कैंसर विशेषज्ञ भी हैरान है। मेडिकल अस्पताल में इस बीमारी से पीडि़त पहला नाबालिग मरीज है। जांच के बाद बच्चे का कैंसर विभाग में उपचार शुरू कर दिया गया है।
पेट में रहता था दर्द
पन्ना निवासी बच्चे को अक्सर पेट में दर्द रहता था। बीते 9 महीने से तकलीफ ज्यादा बढ़ गई थी। मोशन में भी समस्या हुई। परिजनों ने बच्चे की कटनी में एक चिकित्सक के यहां जांच कराई। बच्चे के गुदा द्वार में गांठ मिली। बड़ी गांठ होने के कारण मल द्वार तकरीबन बंद था। चिकित्सक ने मल त्याग के लिए बायपास बना दिया और बच्चे की कैंसर जांच कराने की सलाह दी। परिजनों ने मेडिकल अस्पताल में जांच कराई तो बच्चा गुदा कैंसर का शिकार मिला।
कीमोथैरेपी शुरू
अस्पताल में कैंसर पीडि़त बच्चे का विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू हो गया है। बच्चे को दो बार कीमो थैरेपी दी गई है। उसे अब रेडिएशन थैरेपी दी जाएगी। गांठ की सूजन कम होने पर सर्जरी करके गांठ निकालने पर विचार किया जाएगा।
केस दुर्लभ
स्तन और फेफड़े के कैंसर के मुकाबले गुदा कैंसर के मरीज बेहद कम है। इसके लक्षण धूम्रपान करने वाले लोगों और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ही आमतौर पर मिलते है। यह बीमारी ज्यादा आयु और ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण के शिकार लोगों को होने का भी खतरा रहता है। लेकिन बच्चे को लेकर ऐसे किसी भी कारण से संक्रमण नहीं हो सकता है। ऐसे में यह केस दुर्लभ है। मेडिकल अस्पताल में जांच में भी अभी तक मिले गुदा कैंसर के पीडि़त भी अमूमन 50 वर्ष से अधिक आयु के है।

13 वर्ष का बच्चा गुदा कैंसर से पीडि़त है। यह दुर्लभ प्रकरण है। अमूमन इस बीमारी से पीडि़त 50 और उससे अधिक उम्र के मरीज होते है। धूम्रपान करने वाले में बीमारी की आशंका ज्यादा होती है। मरीज की थैरेपी की जा रही है।
- डॉ. श्यामजी रावत, कैंसर रोग विशेषज्ञ, एनएससीबीएमसी