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हैंडलूम में करियर: हथकरघा पर फिर बनेगा देशी कपडा, अगले महीने से ट्रेनिंग

हैंडलूम में करियर: हथकरघा पर फिर बनेगा देशी कपडा, अगले महीने से ट्रेनिंग

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 Handloom weaving training

Handloom weaving training

जबलपुर। हथकरघा (हैंडलूम) पर कपड़ा तैयार करने का काम शहर में फिर से शुरू होगा। अभी अलग-अलग संस्थाओं के जरिए 50 से ज्यादा हथकरघा चल रहे हैं। उनमें गमछा और धोती तैयार होती है। अब जिला पंचायत इस काम को चालू कराएगा। इस काम में रुचि रखने वाले लोगों को अगले महीने से टे्रनिंग दी जाएगी। फिर उन्हें हैंडलूम की स्थापना से लेकर तमाम प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। एक दशक पहले बंद हुआ यह उद्योग फिर से पनप सकेगा।

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यह उद्योग रोजगार का बड़ा माध्यम है। जबलपुर इसका हब हुआ करता था। लेकिन अब यह नाममात्र के रह गए हैं। जो कारखाने पहले चलते थे, उनमें कोई नहीं बचा। एक दशक पहले यह बंद हो गए हैं। कुछ संस्थाएं और व्यक्ति छोटे पैमाने पर यह काम कर रहे हैं। जिला पंचायत में हथकरघा विभाग संचालित है, लेकिन काम नहीं होने से विभाग की अहमियत भी कम हो गई है। विभाग इसे बढ़ावा देने के लिए छोटे स्तर पर हथकरघा को पुर्नस्थापित करना चाहता है। हथकरघा वस्त्रों अपनी पहचान है। महेश्वरी और चंदेरी साडिय़ां और कुछ अन्य वस्त्र पूरे देश में प्रसिद्ध हैं।

2 हजार से ज्यादा थे हथकरघा
हथकरघा उद्योग के रूप में प्रदेशभर में जबलपुर का अपना नाम था। हथकरघा पर साड़ी, कुर्ता पैजामा का कपड़ा, धोती, दुपट्टा, टॉवेल, गमछा के अलावा अन्य वस्त्र तैयार होते थे। ऐसे करीब 2 हजार हथकरघा अलग-अलग जगहों पर संचालित थे। इनमें 4 से 5 हजार लोगों को रोजगार भी मिलता था। सरकारी मदद में कमी, कम होते मार्केट और नई तकनीक से वस्त्र उत्पादन के चलते से कारीगरों ने इस काम को छोड़ दिया। संगठित रूप से चलने वाले यह हथकरघे करीब 10 वर्ष पूर्व पूरी तरह बंद हो गए। उनकी जगह शहर में पावरलूम ने जगह ले ली। वर्तमान में करीब 350 पावर लूम चल रहे हैं। इनमें लगभग 250 ऐसे हैं जो कि नियमित रूप से चलते हैं।

युवा में जागा स्वदेशी का जुनून
एक तरफ हैंडलूम के कारखाने बंद हो गए, दूसरी तरफ पनागर में एक युवा ने नए हैंडलूम स्थापित किए हैं। सक्षम खजांची जैन नाम के इस युवा ने पांच हेंडलूम स्थापित किए हैं। वह इस पर सूती कपड़ा बनाते हैं। उनका कहना है कि स्वदेशी कपड़ें का अपना महत्व है। भारत में बने सूती कपड़े की मांग न केवल देश बल्कि विदेशों में खूब है। उनका कहना है कि स्वदेशी प्रेम और आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से यह काम शुरू किया है। उन्होंने बताया कि वे इस काम को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं। भले ही इसमें मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम है लेकिन वे इसे कर रहे हैं।

जिले में हैंडलूम बंद हो चुके हैं। इनका स्थान पावरलूम ने ले लिया है। विभाग की योजना है कि पुन: यह काम शुरू हो। इसके लिए करीब एक दर्जन युवाओं को अगले माह प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- प्रदीप मिश्रा, सहायक संचालक, हथकरघा विभाग जिला पंचायत