
जयपुर में अधिवक्ता के मुंशी और उसके परिवार को सुरक्षा देने के हाईकोर्ट ने दिए आदेश
जबलपुर। हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से शहर में अवैध रूप से संचालित ऑटो रिक्शों पर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की। कोर्ट को बताया गया कि संशोधित मोटर वीकल एक्ट के प्रावधान लागू करने का मामला कैबिनेट की उप समिति के समक्ष रखा गया है। इस सम्बंध में प्रगति जारी है। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच ने इसे रेकॉर्ड पर लिया। कोर्ट ने सरकार को इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया।
यह है मामला
अधिवक्ता सतीश वर्मा व नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया कि शहर में चल रहे ऑटो कॉंट्रैक्ट कैरिज परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं। इनकी धमाचौकड़ी पर नियंत्रण करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे। आग्रह किया गया कि इस मनमानी पर लगाम लगाई जाए। ओवरलोडिंग रोकी जाए। मनमानी किराया वसूली रोकने के लिए किराया सूची सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा की जाए। जगह-जगह रोक कर सवारियां चढ़ाने-उतारने के बजाय रूट व स्टॉप फिक्स किए जाएं।
सरकार नही लागू कर रही संशोधन
सोमवार को याचिकाकर्ता अधिवक्ता सतीश वर्मा ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में मोटर वीकल संशोधन अधिनियम लागू किया। लेकिन, राज्य सरकार इस अधिनियम को लागू नहीं कर रही। राज्य सरकार की योजना में स्मार्ट रीडर लगाना शामिल नहीं है। अधिवक्ता सतीश वर्मा ने कोर्ट को बताया कि कागजी रिपोर्ट बार-बार पेश कर के कोर्ट को गुमराह किया जा रहा है। ऑटो चालक ओवर लोडिंग समेत सारे नियम तोड़ रहे हैं। ऑटो में ड्राइवर सीट पर चार सवारी और पीछे 15 सवारी बिठाते हैं। जबकि, ड्राइवर को सिर्फ तीन सवारी, वो भी एक ही बार में एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने का परमिट है। सरकार दिखावे के लिए कार्रवाई करती है। सेंट्रल गवर्नमेंट के मोटर वीकल संशोधित रूल्स 2019 मध्य प्रदेश में लागू नहीं किए जा रहे।पहले यह कह चुकी है हाइकोर्ट
शहर भर में दौड़ रहे मॉडीफाइड ऑटो रिक्शा
कोर्ट ने पूर्व सुनवाइयों के दौरान राज्य सरकार की कार्रवाई को नाकाफी बताया था। कहा था कि पूरे शहर में मॉडीफाइड ऑटो दौड़ रहे हैं। इनमें ड्राइवर सीट बढ़ा ली गई हैं। सीट के सामने पटिया लगा कर अतिरिक्त सवारियां ढोई जा रही हैं।चहुं ओर मनमानी
कोर्ट ने कहा था कि बिना समुचित जांच के रूट परमिट दिए जा रहे हैं। ऑटो रिक्शा वाले मनमानी तरीके से कहीं भी रोक रहे हैं। सवारियों की ओवरलोडिंग हो रही है। भाड़ा तालिका समुचित व निर्देर्शित जगह नहीं लगाई गई हैं।
कलर कोडिंग, रूट का पालन कराने की थी चेतावनी
11 फरवरी 2019 को कोर्ट ने कहा था कि निर्धारित रूट के मुताबिक ही ऑटो का संचालन किया जाए। कलर कोडिंग व रूट नियमों का सख्ती से पालन हो।
Published on:
12 Jul 2022 09:16 pm
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