
Multi-Crore Scam in Medal Procurement(AI Image-Chatgpt)
पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उन पदकों का है, जो दिखने में तो सोने की परत चढ़े चांदी के बताए गए थे, लेकिन असलियत कुछ और ही निकली। अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई कर रही है और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, रेलवे और इंदौर की एक निजी कंपनी मेसर्स वायबल डायमंड्स के बीच करीब 49.68 लाख रुपये का करार हुआ था। इस समझौते के तहत 23 जनवरी 2023 को 3640 पदक रेलवे को सप्लाई किए गए। दावा किया गया था कि ये पदक चांदी के हैं, जिन पर सोने की परत चढ़ी हुई है। उस समय इन पदकों की गुणवत्ता की जांच भी कराई गई थी और रिपोर्ट में चांदी की शुद्धता 99.90 प्रतिशत बताई गई थी। यानी सब कुछ कागजों में सही दिख रहा था।
करीब ढाई साल बाद, 12 सितंबर 2025 को रेलवे के विजिलेंस विभाग ने दोबारा इन पदकों के नमूने लिए। शायद किसी को शक हुआ होगा या फिर यह एक नियमित प्रक्रिया रही हो, लेकिन इस बार जो सामने आया, उसने सबको चौंका दिया। नमूनों को दो अलग-अलग प्रयोगशालाओं, नोएडा की एक एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब और कोलकाता की सरकारी लैब में जांच के लिए भेजा गया। रिपोर्ट आई तो हड़कंप मच गया। जांच में पाया गया कि जिन पदकों को चांदी का बताया गया था, उनमें असल में तांबे की मात्रा 99.80 प्रतिशत थी। यानी जो चीज चांदी के नाम पर खरीदी गई, वह लगभग पूरी तरह तांबे की निकली। यह सीधे-सीधे धोखाधड़ी का मामला बनता है।
अब सवाल उठता है कि पहली जांच में सब कुछ सही कैसे पाया गया? क्या उस समय जांच में लापरवाही हुई या फिर जानबूझकर गलत रिपोर्ट दी गई? इसी कड़ी को जोड़ने के लिए अब सीबीआई मैदान में उतरी है। सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे लेन-देन, जांच प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। कंपनी के निदेशक विपुल जैन का नाम भी इस मामले में सामने आया है।
Published on:
01 Apr 2026 03:22 am
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