चन्द्रमुखी इष्ट दात्री, इष्टम् मन्त्र स्वरूपिणीम्
धनदात्री, आनन्ददात्री, चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् ॥
नानारूपधारिणीम्, इच्छामयी ऐश्वर्यदायिनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी, चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
करती हैं धन धान्य की वर्षा दुर्गा सप्तशती के अनुसार मां चन्द्रधण्टा की उपासना हमारे इस लोक और परलोक दोनों के लिए परमकल्याणकारी और सद्गति को देने वाली है। इन्हें ज्ञान की देवी भी माना गया है। देवी के कंठ में सफेद पुष्पों की माला और सिर पर रत्नजडि़त मुकुट शोभायमान है। यह साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी और संपन्न होने का वरदान देती हैं। कहा जाता है कि यह हर समय दुष्टों के संहार के लिए तैयार रहती हैं और युद्ध से पहले उनके घंटे की आवाज ही राक्षसों को भयभीत करने के लिए काफी होती है।
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दुर्गा के दूसरे रूप में समाए हैं ये खास राज, जरूर पढ़ें ये है महिमामां चंद्रघंटा दुष्टों का संहार करती हैं। अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। धर्म, सत्य व देवी भक्तों
का विरोध करने वालों का वे सर्वनाश कर देती हैं। ज्योतिषाचार्य पं. हरिप्रसाद तिवारी की पुस्तक में उल्लेख है कि व्यक्ति की सफलता का पैमाना उसके पैसों और संसाधनों से नहीं लगाना चाहिए। संतोष ही सबसे बड़ा धन है। जो लोग सत्य और धर्म से विमुख हैं वे धनवान होने के बाद भी दुखी हैं। यह सब देवी की ही महिमा है। मां चंद्रघंटा को यदि को श्रद्धाभाव से नमन ही कर ले तो उसकी सफलता के हर मार्ग खोल देती हैं। सत्य व धर्म का साथ देने वालों पर मां चंद्रघंटा की कृपा सदा बनी रहती है।
ये भी दर्शनपं. तिवारी की पुस्तक के अनुसार पहला दिन शैलपुत्री का है यानि संकल्प चट्टान की तरह होना चाहिए। दूसरा दिन ब्रम्हचारिणी का है। इसका मतलब यही है कि संकल्प की पूर्ति के लिए एक ब्रम्हचारी की तरह सादगीयुक्त होकर जुटना चाहिए। चकाचौंध में फंस जाने वालों की सफलता संदिग्ध होती है। तीसरा दिन सिंहारूढ़ मां चंद्रघंटा का है जो बताता है कि संकल्प की पूर्ति के लिए पूरे सामथ्र्य के साथ जुट जाना चाहिए, लेकिन धैर्य नहीं खोना चाहिए।
रविवार का पूजन मुहूर्तचौघडिय़ा के अनुसार नवरात्र के तीसरे दिन प्रात: 9 बजकर 03 मिनिट से 12 बजकर 12 मिनिट तक लाभ व अमृत योग है। इसके अलावा दोपहर में 1 बजकर 46 मिनिट के बाद भी रात्रि तक पूजन के शुभ मुहूर्त हैं। ज्योतिषाचार्य पं. विवेक पाठक का कहना है कि मां भवानी को जिस समय भी याद किया जाए, वे तभी कल्याण करती हैं। इसलिए उनका नाम कल्याणी भी है।
- प्रेमशंकर तिवारी