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छोटे निवेशकों को मिलेगी छत, हाथों को काम

जबलपुर में क्लस्टर कल्चर, गारमेंट चल रहा, कई पाइपलाइन में

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Readymade Garment Cluster

Readymade Garment Cluster

जबलपुर. एक ही उत्पाद की सैकड़ों इकाइयां एक जगह संचालित होने का क्लस्टर कल्चर शहर को रास आ रहा है। लगातार नए क्लस्टर की योजना बन रही है। रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर सफलतापूर्वक चल रहा है। जल्द ही फर्नीचर और मिष्ठान क्लस्टर धरातल पर आएगा। यही नहीं नए निवेशकों को रुझान देखते हुए उद्योग विभाग फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग और हर्बल उत्पादों के क्लस्टर की दिशा में काम शुरू करने जा रहा है।

क्लस्टर की खासियत यह होती है कि एक ही उत्पाद की कई वेरायटी बनाने वाली इकाइयां लगती हैं। इनमें ज्यादा निवेश की आवश्यकता नहीं होती। दूसरी तरफ रोजगार का दायरा बड़ा होता है। क्योंकि सूक्ष्म एवं मध्यम स्तर की औद्योगिक इकाइयां इसमें लगती है। यह क्षेत्र सबसे ज्यादा रोजगार भी मुहैया करवाता है। शासन ने भी इसके लिए प्रोत्साहन योजना चला रखी है। इसका फायदा भी शहर के उद्यमी उठा रहे हैं।

जबलपुर में ऐसे कई उत्पाद हैं जिनका की व्यापक पैमाने पर उत्पादन होता है। लेकिन यह व्यविस्थत नहीं हैं। एक उद्योग यहां तो दस दूसरी जगह चलते हैं। इसलिए उनकी ब्रॉन्डिंग नहीं हो पाती है। जितना मूल्य मिलना चाहिए, वह नहीं मिलता। इसी प्रकार रोजगार की दृष्टि से भी यह उतना बेहतर नहीं होता है। इसलिए उन्हें एक स्थान पर लाए जाने की योजना बनाई गई है। इसी को क्लस्टर स्कीम कहा जाता है।

बनता है औद्योगिक वातावरण

जिस जगह पर क्लस्टर बनता है, वहां पर औद्योगिक वातावरण भी तैयार होता है। आसपास का क्षेत्र भी उसी में ढल जाता है। क्लस्टर में इकाइयां तो आसपास कच्चे माल एवं जरुरत की चीजों की दुकानें भी चलती हैं। यह रोजगार का ***** भी बन जाता है। क्योंकि लोगों को भी जानकारी रहती है कि वहां किस प्रकार के श्रमिकों की आवश्चकता होती है। गोहलपुर लेमा गार्डन में संचालित रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर इसका उदाहरण है। अब आसपास सिलाई से जुड़ी चीजों के कारोबारी बढ़ रहे है। दूसरे कच्चे माल की दुकानें भी खुल रही हैं।

200 इकाइयों की स्थापना

जबलपुर गारमेंट एंड फैशन डिजाइनिंग क्लस्टर शहर का पहला क्लस्टर है। इसमें छोटी और बड़ी कुल 200 इकाइयां स्थापित हैं। इनमें सलवार सूट के अलावा दूसरे वस्त्रों का उतपादन हो रहा है। 60 करोड़ रुपए की लागत वाले इस क्लस्टर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर के अलावा डाइंग एवं वाशिंग प्लांट है।

प्रस्तावित क्लस्टर

क्लस्टर-- स्थान--क्षेत्रफल--इकाइयां--निवेश--रोजगार

गारमेंट क्लस्टर फेज-2 कुदवारी 06 125 150 5000

फर्नीचर क्लस्टर भटौली 21 150 200 5000

मिष्ठान व नमकीन क्लस्टर रिछाई 2.21 200 18 4500

नोट::क्षेत्रफल हेक्टेयर और निवेश करोड़ में।

इनकी संभावनाएं

डिफेंस क्लस्टर

जबलपुर में डिफेंस प्रोडक्शन अंग्रेजी शासनकाल से होता रहा है। दो आयुध निर्माणियां आजादी से पहले की स्थापित हैं। फिर दो निर्माणियां और खुलीं। वर्षों तक आयुध निर्माणी बोर्ड के अंतर्गत यह निर्माणियां अब निगमों के अधीन हैं। अब इनकी अपनी कंपनी हैं। रक्षा उत्पादों के उत्पादन में महत्वपूर्ण बात लागत कम करना है। इन निर्माणियों को अब कच्चे माल की जरुरत पडे़गी ऐसे में यहां पर डिफेंस क्लस्टर की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसकी स्थापना को लेकर मुख्यमंत्री भी पहले प्रयास कर चुके हैं।

फेब्रिकेशन क्लस्टर

शहर में गोहलपुर, हनुमानताल, अधारताल, मदन महल क्षेत्र में फेब्रिकेशन का बड़ा काम होता है। 300 से जयादा इकाइयां हैं। इनमें 400 करोड़ रुपए सालाना का कारोबार होता है। यहां का बना कूलर गर्मियों में लोगों को ठंडी हवा देता है। आलमारी और ट्रंक खूब पसंद किए जाते हैं। यह उद्योग अभी बिखरा हुआ है। कुछ क्षेत्रों में आसपास इकाइयां हैं लेकिन यह भी व्यविस्थत नहीं हैं। लंबे समय से इसकी मांग चलती रही है लेकिन अब तक यह पूरी नहीं हुई है। ऐसे में यह क्लस्टर भी शीघ्र बन सकता है।

टिम्बर क्लस्टर

टिम्बर कारोबार भी व्यापक पैमाने पर चलता है। अभी मदन महल, गोरखपुर, गढ़ा, महानद्दा और तिलवारा क्षेत्र में छोटे और बडे 320 टिम्बर कारखाने चलते हैं इनमें 4 हजार से अधिक लोग काम करते हैं ।सालाना 250 करोड़ रुपए के टर्न ओवर वाले इस कारोबार को भी एक जगह स्थापित नहीं किया जा सका है। इकाई संचालकों ने हमेशा इसे क्लस्टर के रूप में शहर से बाहर संचालित करने के लिए जगह की मांग की है। इससे न केवल आधुनिक मशीनें स्थापित होंगी बल्कि रोजगार भी बढे़गा।

फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर

कृषि के मामले में जबलपुर अग्रणी जिलों में शामिल है।कई प्रकार की फसलें यहां लगाई जाती हैं। धान की उच्च किस्में लगाई जाती हैं। गेहूं बड़ी मात्रा में होता है। इनकी प्रोसेसिंग की इकाइयां कम हैं। राइस मिल हैं लेकिन वे अलग-अलग जगहों पर चलती हैं। गेहूं की खरीदी तो व्यापारी यहां से करते हैं लेकिन उसकी ग्रेडिंग और पैकजिंग दूसरी जगह होती है। ऐसे में किसानों को उतना लाभ नहीं मिल पाता। मटर और सिंघाड़ा की व्यापक पैमाने पर खेती होती है। लेकिन इनकी प्रसंस्करण इकाइयां नहीं हैं।

क्ल्स्टर प्रोत्साहन योजना के तहत जबलपुर में गारमेंट क्लस्टर फेज-2 और फर्नीचर क्लस्टर की स्थापना की जा रही है। दोनों परियोजनाओं के लिए भूमि का आवंटन हो चुका है। आगामी समय में फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग एवं हर्बल उत्पाद क्लस्टर की दिशा में काम किया जाएगा।

विनीत रजक, महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र