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दिखावा बनी जनसुनवाई, एक माह के 300 प्रकरण अटके

हर मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में सुनी जाती है लोगों की समस्याएं

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कलेक्ट्रेट जनसुनवाई

जबलपुर. इंद्रा आवास योजना के तहत मिले पट्टे की जमीन पर नुनियाकला पनागर निवासी राजेंद्र नामदेव ने पक्का मकान बनाना शुरू किया। प्रधानमंत्री आवास योजना से दो किस्त मिल गई। आधा मकान बना लेकिन गांव के व्यक्ति ने अपनी जमीन बताकर तहसील के माध्यम से निर्माण पर रोक लगवा दी। तीन बार मामला जनसुनवाई में दे चुके हैं। पनागर तहसील में लंबे समय से प्रकरण चल रहा है, उसका समाधान नहीं हुआ। इसी तरह कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में 300 प्रकरण हैं जो लंबित पडे़ हैं।

लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए हर मंगलवार को जनसुनवाई होती है। उसमें प्रकरणों को सुना जाता है लेकिन समाधान की गति धीमी है। इन शिकायतों काे ऑनलाइन करते हुए संबंधित अधिकारी एवं कार्यालय भेज दिया जाता है, लेकिन उसका निराकरण तेजी से नहीं होता। कलेक्टर कार्यालय में 28 फरवरी से 21 मार्च के बीच चार सप्ताह में 375 शिकायतें दर्ज की गईं। उसमें लगभग 60 का निराकरण हुआ है। बाकी अभी दफ्तरों में लंबित पड़ी हैं।

धोखे से बेचनामा पर हस्ताक्षर करवा लिए

अन्य प्रकरण में बादशा हलवाई मंदिर गली नंबर तीन निवासी ममता चौधरी ने जनसुनवाई में शिकायत दी कि उसने एक व्यक्ति के पास जमीन गिरवी रखी थी। उसने धोखे से बेचनामा पर हस्ताक्षर करवा लिए। थाने में शिकायत करने के बाद कलेक्ट्रेट में आवेदन लगाया। उनकी समस्या को सुना गया। प्रकरण एसडीएम गोरखपुर को भेज दिया गया लेकिन अभी तक उस पर सुनवाई नहीं हुई है।

ट्रेसिंग की व्यवस्था

जनसुनवाई में दिए गए आवेदनों पर कार्रवाई के लिए ट्रेसिंग की व्यवस्था की गई है। आवेदक को एक रसीद दी जाती है। उसमें एक नंबर मिलता है, उसे यदि वह उत्तरा पोर्टल में सर्च करता है तो आवेदन पर कार्रवाई की जानकारी मिलती है। इसमें यह पता चलता है कि आवेदन का समाधान कौन करेगा। उसकी वर्तमान िस्थति क्या है।

जनसुनवाई में आने वाले आवेदनों का निराकरण किया जाता है। कुछ शिकायतों को समय सीमा में दर्ज कर लिया जाता है। कई बार प्रक्रिया और प्रतिवेदन में देर हो जाती है। इसी प्रकार समाधान हो भी जाता है तो अधिकारी उसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं करते।

ब्रजेश ठाकुर, अधीक्षक, कलेक्टर कार्यालय