
Mathura : नाग बना जानी दुश्मन, युवक को डसकर हर बार हो जाता है गायब, 6 महीने में 7 बार काटा।
प्वाइंटर
- 350 प्रजातियां हैं सांपों की देशभर में
- 20 फीसदी सांप होते हैं जहरीले- 38 प्रजातियां प्रदेश में
- 23 प्रजातियां जिले में
जबलपुर। नर्मदा का कछार मानव भर के लिए ही नहीं, जंगली और सरीसृप जीवों के लिए भी अनुकूल है। लेकिन, आबादी का दायरा बढऩे व जंगली दायरा सिकुडऩे से एक अलग तरह का संघर्ष छिड़ गया है। इसमें सबसे अधिक संकट में सांप हैं। जानकारों के अनुसार जबलपुर जिले में घर व दूसरे रहवासों में सांप निकलने की २५०-३०० शिकायतें आती हैं। इनमें से आधे ही बच पाते हैं। वरना, डसने के डर से लोग इन्हें मार देते हैं। यह डर अनायास नहीं है। औसतन हर महीने ८ से १० लोगों की मौत सर्पदंश से हो रही है।
डरा रहा संघर्ष
यह संघर्ष जीव विज्ञानियों को डरा रहा है। वजह सांप की कई प्रजातियों पर गहराता संकट है। जबलपुर नदियों, पहाड़ों और जंगल से घिरा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राकृतिक स्थिति सांपों के अनुकूल मानी जाती है। यही वजह है कि यहां विषधर सांपों से लेकर सामान्य प्रजाति के सांप भी पाए जाते हैं। मदन महल, बरगी, डुमना, ईडीके एरिया, खमरिया के अलावा पाटन, कटंगी, शहपुरा के जंगलों में सांपों की विभिन्न प्रजातियां हैं। इन इलाकों में मानव दखल बढऩे से सांप व मानव में संघर्ष बढ़ा है।
ये प्रजातियां शहर में
जबलपुर में किंग कोबरा, करैत, रसैल वाइपर, धामन, अजगर, सुकरी, ट्रिंकेट, बुल्फ स्नेक, ट्रीस्नेक, पनेला, सेंड बोआ, रैंड सेंड आदि प्रजाति के सांप पाए जाते हैं। इनमें से रेंड सेंड बोआ, किंग कोबरा संरक्षित प्रजातियों में शामिल हैं। कुछ प्रजाति के सांपों को सपेरे लाए हैं।
सांपों को बचाने में जुटे सर्प प्रेमी
वन विभाग के साथ ही कई युवा और सर्प विशेषज्ञ सांपों को बचाने में लगे हैं। वे नागपंचमी पर सपेरों के पास मिले सांपों को वन विभाग के सुपुर्द करने और उनका इलाज कराने में भी सहयोग करते हैं।
हर माह सर्पदंश से 10 की मौत
जिले में हर माह सांप निकलने के 200-250 शिकायतें आती हैं। हर माह सांप के डसने से 8-10 लोगों की मौत भी हो रही है। सर्पदंश से मौतों के अधिकतर मामले ग्रामीण क्षेत्रों पाटन, मझौली, पनागर में सामने आए हैं।
वर्जन
शहर में सांपों की कई प्रजातियां हैं। इसमें जहरीले और साधारण सांप भी शामिल हैं। कई बार रेस्क्यू के दौरान सेंड बोआ और किंग कोबरा प्रजाति के सांप भी मिलते हैं। दो दशकों से सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं।
गजेंद्र दुबे, सर्प विशेषज्ञ
दो दशक से सांपों को पकड़ रहे हैं। अब तक हजारों सांपो का रेस्क्यू किया है। घायल सांपों का वेटरनरी चिकित्सकों के सहयोग से इलाज भी कराते हैं। सांपों का संरक्षण आवश्यक है।
धनंजय घोष, सर्प विशेषज्ञ
अधिकतर सांप जहरीले नहीं होते। लेकिन, उनका डर इतना ज्यादा होता है कि लोग इसे देखते ही मारने पर उतारू हो जाते हैं। जबकि, सांप भी पर्यावरण में विशेष भूमिका निभाते हैं।
रत्नेश आथ्या, सर्प मित्र
Published on:
16 Jul 2022 07:12 pm
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