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MP के इस गांव में मिला वर्षों पुराना नक्शा, लिखी है रियासतों की अनूठी कहानी

गौरा गांव तक फैला था भंडरा स्टेट, राजघराने के परिजनों के पास आज भी सुरक्षित हैं अंग्रेजी शासनकाल के आदेश, वर्षों पुरानी सामग्री 

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Balmeek Pandey

Jul 02, 2017

Country's oldest map found in Katni

Country's oldest map found in Katni

जबलपुर/कटनी। आपने देश के कई स्थानों में एक से बढ़कर एक धरोहरें देखी होंगी, उनके रहस्य और महत्व को भी खूब समझा होगा। पुरातत्व धरोहरें, शिलालेख हैं जो इतिहास को ताजा किए हुए हैं। उन्हीं में से एक है कटनी जिले का गौरा गांव। इस गांव में देश का सबसे पुराना नक्शा मिला है, जिसमें एक विशेष रियासत का उल्लेख किया गया है। खास बात तो यह है कि उसमें भंडरा स्टेट की रियासत व अंग्रेजी शासनकाल का वर्णन मिला है। उस रियासत के दस्तावेजों को उनके वंशज द्वारा बड़े ही सुरक्षित ढंग से संजोकर रखा गया है।


मौजूद है राजघराने की निशानियां
अंग्रेजी शासनकाल में जिले के ढीमरखेड़ा तहसील के गौरा गांव तक भंडरा स्टेट फैला था। जमीन-जायदाद के बंटवारे में राजघराने के कुछ सदस्य गौरा गांव में आकर बस गए थे और आज भी उनके पास अंग्रेजों के शासनकाल के आदेश, राजघराने की निशानियां सुरक्षित हैं। गौरा गांव निवासी व राजघराने के सदस्य 83 वर्षीय बाबू राजेन्द्र सिंह 32 वर्ष तक शिक्षा विभाग को सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हो गए हैं। राजघराने से जुड़े होने व शिक्षक पद पर रहने के चलते पूरे क्षेत्र में लोग उनका सम्मान करते हैं। उनके पास आज भी राजघराने का पुस्तैनी अधिकार व स्टेट का अंग्रेजी शासनकाल का नक्शा सुरक्षित है। जिसमें स्पष्ट है कि भंडरा के साथ ही ढीमरखेड़ा के कई गांव स्टेट का हिस्सा उन दिनों हुआ करते थे।

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(शासनकाल में स्टेट का नक्शा दिखाते राजघराने के राजेन्द्र सिंह और अंग्रेज अधिकारियों द्वारा जारी किया गया वर्षों पुराना आदेश)

इनका था साम्राज्य
परिवार के सदस्यों से मिली जानकारी के अनुसार भंडरा के प्रथम राजा गुमान शाह थे और उनके बाद पर्वत शाह, अमान शाह, चैन शाह, भोपाल सिंह, थान सिंह ने राज्य संभाला। अंतिम राजा के रूप में हरभगत सिंह के पास गद्दी आई थी, जो 1950 तक स्टेट के राजा रहे। उसके बाद वे कांग्रेस पार्टी से सिहोरा विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए थे।


20 साल अंग्रेजों ने किया शासन
1846 में राजा चैन शाह के बाद उत्तराधिकारी कुंवर भोपाल सिंह के अशिक्षित होने के कारण राज्य का संचालन अंग्रेजों ने अपने हाथ में ले लिया था। 1866 में गवर्नर जनरल कौंसिास ने लिखित आदेश देकर भोपाल सिंह को भंडरा स्टेट का राजा घोषित किया, जिन्होंने 1886 तक राज किया और उसके बाद परिवार का ही राजा गद्दी संभाले रहा। राजघराने समाप्त होने के बाद परिवार के सदस्य अलग-अलग क्षेत्र में पुस्तैनी जमीनों में रह रहे हैं।

विभिन्न पदों पर दे रहे सेवाएं
राजघराने के सदस्य विभिन्न शासकीय सेवा में आज भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बाबू राजेन्द्र सिंह जहां शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं तो परिवार के ही लाखन सिंह बीडीओ के पद पर पदस्थ रहे हैं। डॉ. योगेश्वर सिंह वतज़्मान में डिप्टी डायरेक्टर स्वास्थ्य हैं तो उनकी पत्नि शशि सिंह विधायक रही हैं। लाखन सिंह के दो पुत्र नील शाह व लोकेश शाह ने कटनी जिले में ही पूर्व में सहायक जिला आबकारी अधिकारी के पद पर सेवाएं दी हैं।

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