
govt rules for csd canteen
जबलपुर. यूनिट रन कैंटीन में रियायती वस्तुओं की खरीदी मात्रा सम्बंधी नियम को सख्त कर दिया गया है। इसका कड़ाई से पालन किया जाए, इसलिए केन्टीन भंडार विभाग (सीएसडी) ने आर्मी एरिया और ऑर्डनेंस फैक्ट्री इस्टेट में चल रहीं यूनिट कैंटीन के सॉफ्टवेयर में परिवर्तन कर दिया है। सॉफ्टवेयर जितनी मात्रा दिखाएगा उससे अधिक साबुन, तेल, शैम्पू और कॉस्मैटिक जैसी दूसरी चीजों को खरीदना मुश्किल होगा। कुछ कैंटीन में विवाद की स्थिति भी निर्मित होने लगी है।
सेना के कार्यरत एवं रिटायर अधिकारी, जवान और डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों के कार्यरत एवं रिटायर कर्मचारियों को यूनिट रन कैंटीन की सुविधा मिलती है। हाल में कुछ एेसी शिकायतों में यह बातें सामने आई कि इस रियायत का दुरुपयोग हो रहा है। बताया जाता है कि सेंट्रल कमांड से मिले निर्देशों के बाद सॉफ्टवेयर में परिवर्तन किया गया है। ऑपरेटर उतनी ही चीजों के बिल काटता है, जितनी तय की गई है।
एएफडी और नॉन एएफडी कोटा है तय
रक्षा मंत्रालय ने एएफडी और नॉन एएफडी कोटा के तहत अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए मासिक सीमा तय कर रखी है। इससे अधिक राशि का ग्रोसरी आइटम वह नहीं ले सकते। एक जानकारी के मुताबिक नॉन एएफडी आइटम के तहत एक जनवरी २०१५ से सीमा को तय किया गया था। इसमें कमिशंड अफसर और बराबर की रैंक के अधिकारी के लिए ११ हजार रुपए प्रतिमाह। अलग-अलग रैंक में जेसीओ को भी ८ से ११ हजार और दूसरी रैंक के अधिकारियों के लिए ५ हजार ५ रुपए कोटा तय है। डिफेंस सिविलियन कर्मचारी जिनका जो पे बैंड ३ एवं ४ में आते हैं, उन्हें भी ११ हजार रुपए कीमत की चीजें खरीदने की पात्रता है। पे बैंड एक एवं दो के लिए क्रमश: ८ हजार एवं ५ हजार ५०० रुपए मासिक कोटा फिक्स है। इसी तरह एएफडी आइटम भी है। इसकी सीमा सालाना ५५ हजार से लेकर १ लाख रुपए तक है। सामान्यत: इसमें ७५० रुपए से ज्यादा कीमत की चीजों को शामिल किया जाता है।
सीएसडी कार्ड से खरीदी की सीमा तय है। अब इसे ज्यादा कारगर बना दिया गया है। इससे इससे जरुरत से ज्यादा मात्रा में खरीदी नहीं की जा सकती ।
- कर्नल बीपी सिंह, जनसंपर्क अधिकारी हेडक्वार्टर मध्यभारत एरिया
यह है स्थिति
- शहर में २८ से अधिक यूनिट रन कैंटीन का संचालन।
- इसमें ८० हजार से ज्यादा है हितग्राहियों की संख्या।
- हर माह २५ करोड़ रुपए से ज्यादा की सामग्री की खपत।
- शहर में संचालित है कैंटीन भंडार विभाग का डिपो।
- मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ महाराष्ट्र में सप्लाई।
- हर माह तीनों राज्यों में ४५ करोड़ से ज्यादा के माल की खपत।
Published on:
20 Mar 2018 12:59 pm
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