
deepest ditch of india-narmada
जबलपुर। शहर के रिटायर्ड प्रोफेसर केके सेठ ने शहर की विभिन्न धरोहरों पर शोध कार्य किया है। उन्होंने मंदिरों, नदी और धरोहरों की बनावट, उद्भव, महत्व और विभिन्न पैमानों से जुड़े तथ्य निकाले हैं। इन स्थानों के रोचक महत्व को समझाने के लिए प्रो. सेठ ने ये शोध कार्य किया है। उनके शोध में कई अनूठे तथ्य भी सामने आए हैं।
जेएनकेवि से रिटायर्ड प्रोफेसर केके सेठ ने बताया कि भेड़ाघाट में बंदर कूदनी नर्मदा की सबसे गहरी घाटी है। यहां गर्मियों में पानी की गहराई ६०० फीट और जलस्तर के दोनों ओर चट्टानों की ऊंचाई ४८ फीट, दोनों पाटों की न्यूनतक चौड़ाई २९ फीट है। नर्मदा की अमरकंटक से भड़ौच तक १३१० किलोमीटर लम्बे मार्ग में प्राकृतिक रूप से सबसे अधिक गहराई बंदर कूदनी की ही है। प्रोफेसर सेठ ने जबलपुर की प्रसिद्ध बेलेंसिंग राक के संबंध में भी शोध किया है। उनके शोध के अनुसार अक्ष रेखा का केंद्र होने कारण बैलेंसिंग रॉक का बेलेंस सदियों से बना हुआ है। यह शिला ३०० वर्षों से यूं ही एक अन्य चट्टान पर टिकी है।
ये हैं रोचक तथ्य
मदन महल की पहाडि़यां - ग्रेनाइट से बनी इन चट्टानों की उम्र ५० से ६५ करोड़ वर्ष पुरानी आंकी गई है। मदन महल में ग्रेनाइट की चट्टान गुलाबी, सलेटी और गुलाबी सलेटी रंग की मिलती है।
मदन महल किला - मदन महल किले के निर्माण में पाषाण, ईंटों से निर्मित परकोटो में लाखोरी ईंटों का उपयोग किया गया है। इसका निर्माण ग्रेनाइट की दो चट्टानों पर हुआ है।
भेड़ाघाट का भूविज्ञान - भेड़ाघाट क्षेत्र का भू विज्ञान १८० से १५० करोड़ वर्ष मिला था। उस वक्त प्राणी प्रारंभिक अवस्था बैक्टीरिया और शैवाल रूप में ही मिलते थे। यहां संगमरमर, शैवाल, शिष्ट और क्वार्टजाइट प्रारंभ में चूना पत्थर, सैंड स्टोन में होने थे, लेकिन पृथ्वी की गहराई में इन पर अधिक दाब पडऩे के कारण यह परिवर्तित चट्टानों में बदल गए।
इन जगहों पर किया शोध कार्य
-शैलपर्ण उद्यान
-भेड़ाघाट
-धुआंधार जलप्रपात
-नर्मदा नदी के मार्ग परिवर्तन का कारण
-चौसठ योगिनी मंदिर
-लम्हेटाघाट
-जबलपुर में डायनासोर
Published on:
02 May 2018 09:44 am
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