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सर्विसिंग में देरी मतलब ‘बर्निंग कार का खतरा

अलर्ट : कभी गैस किट तो कभी इंजन में शार्ट-सर्किट से हो रहे हादसे
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mukesh gaur

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Updated: 29 Dec 2016, 11:17 AM IST

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संतोष सिंह@जबलपुर. अक्सर राह चलते कार या बाइक में आग लग जाती है। कई बार फ्यूल लीकेज की समस्या होती है तो कई बार इंजन में शार्ट-सर्किट बताया जाता है। कई हादसों में वाहन पूरी तरह खाक हो गए। ये चमत्कार ही रहा कि किसी भी हादसे में जनहानि नहीं हुई। वाहन मैकेनिक इसकी वजह वाहन मालिक की लापरवाही बताते हैं। वाहन की सर्विसिंग, ऑइल चेंजिंग या छोटी गड़बड़ी को नजरअंदाज कर देते हैं, जो इस तरह के हादसे की वजह बनती है।

केस 01. 27 दिसंबर को सदर स्थित बिरमानी पेट्रोल पंप से कटंगा निवासी राजकुमार आहूजा ने जैसे ही कार एमपी 20 सीसी 7428 में पेट्रोल भराकर कार स्टार्ट की इंजन में आग लग गई। राजकुमार बाल-बाल बच गए।

केस 02 . 22 जुलाई को तैय्यब अली पेट्रोल पंप स्थित स्कूल से छात्राओं को लेकर शक्तिनगर छोडऩे जा रही वैन एमपी 20 बीए 1457 में ओवरब्रिज के फुटपाथ से टकराने के बाद आग लग गई थी। राहगीरों और ट्रैफिक पुलिस ने बच्चों को बचाया था।

केस 03. जून में मेडिकल कॉलेज के पास चलती कार में आग लग गई थी। हादसे में कार खाक हो गई थी। वजह इंजन में शार्ट-सर्किट होना बताया गया था। मौके पर फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाना पड़ा था।

कार में सिलेंडर से गैस रीफिलिंग करते हुए आग लगी- 07 बार
पेट्रोल पंप के पास कार में लग चुकी है आग- 02 बार
फ्यूल चेंज कर गैस किट लगवाने वाले वाहन- 869
राह चलते कार में लगी आग- 06
बाइक में लगी आग- 03
जिले में रजिस्टर्ड कार- 1.29 लाख
जिले में रजिस्टर्ड बाइक- 5.15 लाख

पुराने वाहन में ज्यादा समस्या
आग लगने का सबसे ज्यादा खतरा पुरानी कार में होता है। ऐसी कारें जिन्हें गैस किट के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, फिर भी किट लगवाई जा रही है। फ्यूल पाइप में लीकेज या गैस किट का उपयोग करना भी इस तरह की घटनाओं की वजह बनती है।

बाजार में आईएसआई मार्का वाला ही गैस किट लगवाएं। इसकी कीमत 18 से 22 हजार रुपए होती है। वाहन के फ्यूल में बदलाव कराने पर परिवहन विभाग रजिस्ट्रेशन करता है। इस तरह के गैस किट वाली टंकी में सेफ्टीवॉल्व होता है, जो हादसा होने पर गैस को लॉक कर देता है। इससे आग लगने का खतरा टल जाता है। नकली गैस किट या सिलेंडर का प्रयोग करने पर गैस लीक होने का सबसे अधिक खतरा होता है। नई गाडि़यों में ऑटोमेटिक फ्यूल सेटिंग दी गई है। एलपीजी वाली कार भी पहले पेट्रोल से स्टार्ट होती है, फिर एलपीजी से चलती है। गैस किट लगवाने वाले वाहन में सब कुछ मैन्युअली करना पड़ता है। अक्सर लोग एलपीजी से ही कार स्टार्ट करते हैं। पेट्रोल वाली फ्यूल लाइन खाली हो जाती है। जब कभी पेट्रोल का प्रयोग करते हैं, तो बैक प्रेशर या पाइप क्रेक हो जाता है और वाहन में आग लग जाती है।
कमलेश, गैस किट मैकेनिक

अक्सर लोग कार या बाइक की समय पर सर्विसिंग में लापरवाही करते हैं। लीकेज होने पर जैसे ही कार स्टार्ट होती है बैटरी के संपर्क से फ्यूल आग पकड़ लेता है। कई लोग कार या वैन में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करते हैं। गैस समाप्त होने पर वे पेट्रोल या डीजल से वाहन चलाने की कोशिश करते हैं तो फ्यूल पाइप में अचानक बैक प्रेशर बन जाता है। इससे भी आग लग जाती है। समय पर सर्विसिंग, ऑइल व फिल्टर चेंज कराते रहना चाहिए।
सतविंदर सिंह, कार मैकेनिक