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हाईकोर्ट ने क्यों कहा मामला दिल दहलाने वाला… जानें क्या है पूरा सच 

चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को सौंपी जांच, 12 अप्रैल तक मांगी रिपोर्ट

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mukesh gaur

Mar 30, 2016

madhya pradesh high court

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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने आदिवासी महिला का जमीन पर प्रसव होने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए इसकी जांच चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को सौंप दी है। चीफ जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस संजय यादव की युगलपीठ ने उन्हें 12 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि यह मामला दिल को दहला देने वाला है, लिहाजा इसकी जांच प्रमुख सचिव स्वयं करें। सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में एमसीआई द्वारा कॉलेज की सम्बद्धता समाप्त करने को चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गत 25 मार्च को मेडिकल कॉलेज में जमीन पर हुए प्रसव मामले पर प्रकाशित समाचारों पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

बच्चे की हुई थी मौत
घटनाक्रम के मुताबिक सागर के समीप गौरझामर निवासी दुर्गाप्रसाद अपनी गर्भवती पत्नी को 25 मार्च को सागर जिला अस्पताल लेकर आया। यहां गंभीर मामले बताते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल में केस को गंभीर नहीं माना गया और उसे वापस जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल वापस आने पर महिला को बेड नहीं मिल पाया। फलस्वरूप जमीन पर उसका प्रसव हुआ। इस दौरान 4 घंटे से ऊपर बीत चुके थे। नवजात शिशु की इस वजह से मृत्यु हो गई।

सीएम आज लेंगे बैठक
इस मामले को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी गंभीरता से लिया है। विधायक शैलेंद्र जैन ने सीएम को घटना से अवगत कराया था। जिस पर मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में आला अफसरों की एक बैठक बुधवार को बुलाई है। विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री मिश्रा के कक्ष में सुबह 9.30 बजे से बैठक होगी, जिसमें विधायक शैलेंद्र जैन, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, संचालक स्वास्थ्य सेवा, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा व संचालक चिकित्सा शिक्षा भी मौजूद रहेंगे।

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