
इस विधि से करें पूजन बरसेगा धन
जबलपुर। शरद पूर्णिमा के साथ दीपोत्सव की आहट सुनाई देने लगी। बाजारों में रौनक बढ़ रही है, वहीं घरों में सफाई और रंग रोगन का दौर चल रहा है। इस बार धनतेरस 17 अक्टूबर, मंगलवार को है। खरीदी के लिए शुभ माना जाने वाला उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र और सूर्य देव का तुला राशि में प्रवेश इस तिथि की शुभता को और बढ़ा रहा है। मंगलवार को सूर्याेदय के साथ ही त्रयोदशी तिथि का आगमन हो जाएगा, जो रात्रि 11 बजकर 38 मिनिट तक रहेगा। तिथि के शुभारंभ से ही मंगलवार को धन के देवता कुबेर के आवाहन और पूजन शुरू हो जाएगा। आइए आपको बताते हैं कि किस मुहूर्त में पूजन किया जाए तो वस्तु न केवल फलदायक रहेगी, बल्कि उसकी घर में उपस्थिति से उन्नति के द्धार भी खुल जाएंगे।
सूर्य देव की कृपा
धन तेरस को सूर्य तुला संक्रांति है यानी इस दिन भगवान सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे। त्रयोदशी पर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. जनार्दन शुक्ल के अनुसार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र युक्त त्रयोदशी पर खरीदी के लिए बेहद शुभ योग बन रहा है। त्रयोदशी का पूरा दिन वस्त्र, वाहनों, आभूषणों और बर्तनों आदि की खरीदी के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। खरीदी के लिए दोपहर ३ बजे से शाम ४.३० बजे के बीच का समय छोड़कर शेष पूरा दिन और रात्रि उपयुक्त रहेगी।
पूजन मुहूर्त
धनतेरस के दिन वैसे तो दोपहर ३ बजे से शाम ४.३० बजे तक का समय छोड़कर पूरे दिन कभी भी पूजन किया जा सकता है। लेकिन प्रात: १०.३० बजे से १२ बजे तक लाभ, दोपहर १२ से १.३० बजे तक अमृत, शाम ३ बजे से ४.30 बजे तक शुभ और शाम ७.30 से ९ बजे तक लाभ का चौघडिय़ा है। गृहस्थों के लिए शाम ७.30 बजे से रात्रि ९ बजे तक का मुहूर्त धनतेरस के पूजन के लिए विशेष रूप से श्रेष्ठ रहेगा।
इस तरह करें पूजन
धन तेरस के दिन खरीदी गई वस्तु को पूजन के स्थान पर रखें। यह संभव नहीं हो तो पूजन के स्थान पर गणेश, लक्ष्मी और कुबेर का स्मरण और पूजन करके वहां से ही सिंदूर, अष्टगंध, चंदन, रोली आदि लेकर नई वस्तु तक जाएं और उसमें स्वास्तिक व अन्य शुभ आकृतियां बनाकर उनका पूजन वंदन करें। पूजन स्थल से लेकर द्वार तक 13 दीप जलाएं। एक दीप नई वस्तु के समीप भी रखें। इसके बाद मिष्ठान्न का भोग लगाकर उसका वितरण करें।
धनवंतरि का पूजन
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन ही समुद्र मंथन से भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। तभी से त्रयोदशी पर उनका पूजन किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. रामसंकोची गौतम के अनुुसार त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरि का आवाहन पूजन करने के साथ औषधियों का पूजन भी करना चाहिए। वैद्य जन इस दिन खास महुर्त में ही औषधियों को आमंत्रित करके उनका पूजन करते हैं। दीपावली की रात इन औषधियों को जाग्रत किया जाता है, फिर साल भर यही औषधियां जरूरतमंदों को दी जाती हैं।
Published on:
07 Oct 2017 03:42 pm
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