
Dhanush gun
जबलपुर। देशी होवित्जर तोप धनुष के फायरिंग में फेल होने की वजहों का खुलासा बोफोर्स बनाने वाली कंपनी स्वीडिश कंपनी खोलेगी। फायरिंग के दौरान 155 एमएम 45 कैलीबर धनुष तोप का मजल फट गया था। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। तोप निर्माण में खामियों का पता लगाया जा रहा है। लेकिन अभी तक खामी ढूंढने में कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिलने पर अब स्वीडिश कंपनी बीएई सिस्टम भी गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) की मदद के लिए आगे आयी है।
धनुष भी मूलत: बोफोर्स
जीसीएफ को जांच में सहयोग करने वाली स्वीडिश कंपनी ही पहले कंपनी बोफोर्स कहलाती थी। धनुष भी मूलत: बोफोर्स तोप ही है। इसमें आमूलचूल परिवर्तन कर जीसीएफ में इसे स्वदेशी बोफोर्स का रूप दिया गया है।
अल्ट्रा लाइटवेट दो तोप आयी
बीएई सिस्टम फॉरेन मिलिट्री सेल्स सिस्टम रूट द्वारा अमेरिका के जरिए देश में एम 777 अल्ट्रा लाइटवेट होवित्जर तोप भारत को सप्लाई कर रहा है। दो तोप आ चुकी हैं। उनकी टेस्ट फायरिंग चल रही है। सूत्रों ने बताया कि बीएई मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत इस तोप को डेवलप करने में भी मदद करेगा।
अब तक 4 हजार राउंड फायरिंग
38 किमी तक मारक क्षमता वाली धनुष तोप से अब तक चार हजार से ज्यादा राउंड फायर किए जा चुके हैं, लेकिन फायरिंग के दौरान दो बार मजल फटने की घटना होने से आगे की फायरिंग रोक दी गई है। जीसीएफ इस बात की तफ्तीश में लगा है कि आखिर गड़बड़ी कहां हो रही है। सूत्रों ने बताया कि अभी तक तोप के सिस्टम में कोई खामी सामने नहीं आई है।
कानपुर फैक्ट्री में बना बैरल
धनुष तोप को जीसीएफ में विकसित किया गया है। लेकिन बैरल और मजल का निर्माण कानपुर आयुध निर्माणी में हुआ है। सूत्रों के अनुसार जीसीएफ बीएई सिस्टम से तकनीकी मत ले सकता है। कंपनी भी इस बात पर सहमत है। यह इसलिए भी ज्यादा उपयोगी साबित होगी, क्योंकि बोफोर्स तोप के निर्माण में कंपनी की बड़ी भूमिका रही है। उनके इंजीनियरों के लिए इस खामी को पकडऩे में उन्हें आसानी होगी। हालांकि, जानकारों का कहना है अभी तक एेसी कोई बड़ी गड़बड़ी सामने नहीं आई है। फिर भी जीसीएफ प्रबंधन तकनीकी मत लेने का प्रयास कर रहा है।
Published on:
06 Sept 2017 09:51 am
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