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जबलपुर में हो रही ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती

पनागर और सिहोरा के किसानों ने खेती में नवाचार करते हुए छोटे स्तर पर फलों की खेती शुरू की। उन्हें बाजार में अच्छी कीमत भी मिल रही है। इसलिए अब वे उसका रकबा बढ़ा रहे हैं।

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Dragon food and strawberry cultivation being done in Jabalpur

Dragon food and strawberry cultivation being done in Jabalpur

जबलपुर। अंचल के खेतों में उपजे ड्रैगन फूड और स्ट्रॉबेरी के फल लोगों को ललचा रहे हैं। बाजारों में भी इनकी अच्छी मांग है। सेहत के लिए फायदेमंद माने जाने वाले दोनों फलों की खेती में हो रही अच्छी उपज को देखते हुए किसान खेती का रकबा बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

हर तीसरे दिन स्ट्रॉबेरी की तुड़ाई
पनागर मटामर के किसान सतीश कुमार दुबे आधा एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। वे हर तीसरे दिन फल की तुड़ाई करते हैं। एक बार में 10 किलो स्ट्रॉबेरी निकलती है। इसमें 200 ग्राम के 50 बॉक्स बन जाते हैं। एक बॉक्स की कीमत थोक बाजार में 40-50 रुपए तक मिल रही है। इससे उन्हें एक बार की तुड़ाई में ढाई हजार और माह में 25 हजार रुपए तक मिल रहे हैं। ङ्क्षतदनी गांव के अजय नायडू भी आधा एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।

190 रुपए किलो तक कीमत
सिमरिया सिहोरा के किसान हरि प्रकाश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने यू-ट््यूब से ड्रैगन फूड की खेती करना सीखा। महाराष्ट्र के सोलापुर से बेल लेकर आए। कृषि वैज्ञानिक से सलाह लेकर 25 डिसमिल में खेती शुरू की। 18 महीने में फल आने लगे। बाजार में 190 रुपए किलो कीमत मिल रही है। उन्होंने बताया कि उनके खेत में 400 से 600 ग्राम वजनी फल निकल रहे हैं। इसका स्वाद कीवी और तरबूज के जैसा होता है।

सेब के पेड़ों पर आने लगे फूल
किसान हरि प्रकाश ने बताया कि उन्होंने पिछले साल हिमाचल से मंगवाकर सेब के 100 पौधे लगाए थे। 20 दिन पहले से उनमें फूल नजर आने लगे हैं। कुछ पेड़ों पर छोटे फल भी लग रहे हैं। इस साल सेब के 300 पौधे और लगाए हैं।