
Drivers Sheet
Drivers Sheet : सैन्य वाहन हों या कमर्शियल वीकल उनके ड्राइवर को अधिकतर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में जहां यात्रियों को सुविधायुक्त सिटिंग मिल जाती है, वहीं ड्राइवर सामन्य कुर्सी पर बैठकर ही पूरी यात्रा तय करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सैन्य वाहनों और कमर्शियल वीकल के ड्राइवरों के लिए एयर सस्पेंशन कुर्सियां तैयार की गई हैं। जो लंबी दूरी में भी ड्राइवरों को बिना थके ड्राइविंग करने में मदद करेंगी। इन कुर्सियों को इंडियन मैन्यूफैक्चरिंग कॉन्क्लेव में आई कंपनी ने प्रदर्शित करते हुए सैन्य वाहन बनाने वाली कंपनियों को आकर्षित किया। वीकल फैक्ट्री, टाटा और अशोक लेलेंड के अधिकारियों ने भी इनकी जानकारी ली।
कंपनी के अधिकारी संदीप जलालपुरी ने बताया यह सीट लंबी दूरी के साथ ऊबड़-खाबड़ वाले रास्तों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। ये न्यूमैटिक सस्पेंशन या एयर सस्पेंशन पर संचालित होती हैं। इनके साथ एक कंप्रेशर लगाया गया है, जो गाड़ी से कनेक्ट करने पर सीट के लिए काम करेगा। इस सीट की खासियत है कि ये 800 से 1000 किमी लंबी दूरी पर जाने वाले ड्राइवरों को थकान नहीं होने देगी। यह सुविधा आज की तारीख में सैन्य वाहनों में नहीं है। इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए के बीच आ रही है।
मैकेनिकल सस्पेंशन सीट को पूरी तरह से भारत में ही तैयार किया गया है। यह सीट आर्मी वीकल के साथ नॉर्मल ट्रक में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। वर्तमान में जो सीटें ड्राइवर को मिलती हैं वे वीकल के सस्पेंशन के आधार पर काम करती हैं। जबकि इनकी खुद की सस्पेंशन है जो ड्राइवर को पूरे रास्ते कंफर्ट देगी, चाहे वीकल का सस्पेंशन खराब क्यों न हो गया हो। इसके अलावा इसमें ड्राइवर के वेट के अनुसार सस्पेंशन को सेट किया जा सकता है। जो पहले कभी किसी भी सीट में नहीं दिया गया है। इसकी कीमत 15 से 20 हजार रुपए के बीच आती है। ये दोनों प्रॉडक्ट पूरी तरह से ऑर्डर के लिए तैयार हैं। इनकी टेस्टिंग भी सफल रही है।
कॉन्क्लेव में एक कंपनी ने अपने थ्रीडी तकनीत से तैयार होने वाले डिफेंस मशीनरी के पाट्र्स रखे हुए हैं। उन्होंने बताया पहले प्लास्टिक या अन्य सॉफ्ट मटेरियल से ही थ्रीडी मॉडल या प्रॉडक्ट बनाए जाते रहे हैं। वहीं उनकी कंपनी मैटल पर इक्यूपमेंट्स और पाट्र्स तैयार कर रही है। इनमें एक्यूरेशी भी परफेक्ट मिल रही है। इनके अलावा उनकी कंपनी पिस्टल, राइफल के महत्वपूर्ण पाट्र्स बनाती है, जिसे लेकर वे एग्जिबीशिन में आए हैं।
Updated on:
10 Nov 2025 12:32 pm
Published on:
10 Nov 2025 11:09 am
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