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यहां मिला दुलर्भ बेल पत्र, आपको भी चौंका देगा इसमें छिपा अद्भुत रहस्य 

दिल जैसे आकार का है बिल्व पत्र, इसके दर्शन मात्र से दूर होती हैं बाधाएं

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Prem Shankar Tiwari

Jul 21, 2017

durlabha bel patra found in Jabalpur

durlabha bel patra found in Jabalpur

जबलपुर। सावन और फिर भगवान शिव के पूजन की बात आए और बिल्व पत्र की चर्चा नहीं हो, यह नामुमकिन है। महीना सावन का ही है और जगह-जगह शिवजी के अभिषेक और वंदन की धूम है। पूजन में उन्हें बेल पत्र अर्पित करके प्रसन्न किया जा रहा है। माना जाता है कि बिल्व पत्र भगवान शिव को बेहद प्रिय है। कहा भी गया है 'दर्शनम् बिल्व पत्रस्य, स्पर्शनम् पाप नाशनम्...' बेल पत्र का दर्शन कर लेने मात्र से पापों का शमन हो जाता है। बेल पत्र अगर दुर्लभ या विशेष प्रकार हो तो फिर इसके क्या कहने...। दमोहनाका त्रिमूर्ति नगर निवासी गीता देवी को ऐसा ही दुर्लभ बेल पत्र मिला है। यह बेलपत्र बिल्कुल दिल जैसे आकार का है। जानकार बताते हैं कि इस तरह के बेल पत्र का मिलना और दर्शन बेहद शुभ होता है। इसको शिवजी अर्पित करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

durlabha bel patra found in Jabalpur


शिवजी को समर्पित
दिल जैसे आकार का बेल पत्र मिलने के बाद गीता देवी के घर में उसे देखने वालों की भीड़ लग गई। कई पुरोहित और जानकार भी पहुंच गए। ज्योतिषाचार्य पं. अखिलेश त्रिपाठी का कहना है कि चार, पांच व सात पत्तों वाले बेल पत्र की तरह इस प्रकार का बेल पत्र भी दुर्लभ माना गया है। इस तरह के बेल पत्र में यदि राम का नाम लिखकर उसे शिवजी को अर्पित कर दिया जाए तो उसका अनंत फल प्राप्त होता है। गीता देवी ने यही किया। उन्होंने बेल पत्र में भगवान राम का नाम लिखकर उसे उनके प्रिय भगवान शिव को अर्पित कर दिया।

durlabha bel patra found in Jabalpur


बेल पत्र से जुड़ी कुछ खास बातें
- बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते ।
- अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है ।
- वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है ।
- चार, पांच, छ: या सात पत्तों वाला बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली होता है। इसे शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है ।
- बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है। और बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
- सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापों का नाश हो जाता है।
- बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते है।
- बेल वृक्ष और सफेद आक को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
- बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
- जीवन में सिर्फ एक बार भी शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी उसके सारे पाप मुक्त हो जाते हैं।
- बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने जैसा लाभ मिलता है।