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नर्मदा के इन तटों पर देह त्यागने से मिलती है चिरशांति, जानिए अनूठा रहस्य

अमरकंटक से भरूच तक हैं हजारों तीर्थ स्थान, नर्मदा पुराण में मिलता है विशेष महत्व

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Prem Shankar Tiwari

Jan 03, 2017

narmada river history

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जबलपुर। रूद्र कन्या मां नर्मदा न सिर्फ पापों का नाश करतीं हैं बल्कि मां हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। मां के तट की एक सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर जो भी देह त्यागता है या फिर उनके पंचतत्वों में विलीन किए जाने का संस्कार होता है उस जीवात्मा को चिरशांति मिलती है। पं. अंबिका प्रसाद शुक्ल बताते हैं कि नर्मदा पुराण में आता है कि मां नर्मदा की तपस्या से जब शिवजी प्रसन्न हुए। मां ने कहा कि पिताजी में जल रूप में मानव जाति की सेवा करना चाहती हूं, सारे तीर्थों का दर्शन लाभ मानव को केवल मेरे दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाए। मेरे जल से स्नान से करने पर ब्रम्हहत्या, कालसर्प दोष भी समाप्त हो जाए। मैं सदानीरा रहूं। मेरे जल का हर पाषाण शिव हो। मेरे तट पर जो भी देह त्यागे उसे 84 लाख योनियों के आवागमन से मुक्ति मिले। मां सदा अविरल स्वच्छ बरती रहें इसी अवधारणा को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा नमामि देवि नर्मदे नर्मदा सेवा यात्रा निकाल रही है।


है विशेष महत्व

नर्मदा पुराण के अनुसार तेरह सौ किलोमिटर का सफर तय करके अमरकंटक से निकलकर नर्मदा विंध्य और सतपुड़ा के बीच से होकर भरुच के पास खंभात की खाड़ी में मिलने वाली नर्मदा नदी का विशेष महत्व है। नदी के तट बहुत ही प्राचीन माने जाते हैं। गंगा स्वयं मां नर्मदा से मिलने आती हैं। मां के एक-एक तट विशेषताओं से भरा पड़ा है। मां के तटों का सौंदर्य तो देखते ही बनती है। कपिलधारा, दुग्धधारा, बंदरकूदनी, धुआंधार की तो महिमा ही निराली है।

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तट और जल दोनों का विशेष महत्व

नर्मदा पुराण के अनुसार मां के तट और जल का खासा महत्व है। यदि नर्मदा नदी में जल प्रयाण कोई व्यक्ति करके प्राण त्यागता है तो उसकी बात ही निराली है। नर्मदा के प्रमुख तटों पर प्राण त्यागने और संस्कार से सदा के लिए जीव को शांति मिलती है। मां नर्मदा के प्रमुख तीर्थ व प्रसिद्ध स्थल।

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यह हैं जिलेवार तीर्थ स्थल
अनूपपुर
श्री नर्मदा मंदिर, नर्मदा की उद्गम स्थली, सोनमूडा सोभद्र का उदगम स्थल, माई की बगिया, कपिलधारा, दूधधारा, प्राचीन करणमठ, श्री पातालेश्वर महादेव, श्री विष्णु मंदिर अमरकंटक, धूनी पानी, कबीर चबूतरा आश्रम, धरमपानी काली माता मंदिर, भृगु कमण्डल, श्री बर्फानी आश्रम, श्री यंत्र मंदिर, कल्याण आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, शान्ति कुटी, श्री आदिनाथ जैन मंदिर, शंकराचार्य आश्रम, अमरनाथ घाट, बेलघाट, रामघाट, सिवनी संगम घाट, तुलसीघाट, चन्दनघाट, दूधी घाट
डिण्‍डौरी
अरंडी संगम, चक्रतीर्थ, बाबाघाट, कपिलधारा, रामघाट, भीमकुंडी, सिवनी संगम, शिवालय घाट, चंदनघाट, नर्मदाघाट, ऋणमुक्तेश्वर मंदिर, रामघाट, डेमघाट काशीघाट, जोगीटिकरियाण्, देवनाला, कुकर्रामठ, मालपुरण् कनै नदी संगम, कुटरई
मण्‍डला
सहस्त्रधारा, रंगरेजघाट, हनुमानघाट, शिवानंद आश्रम, बेंलघाट आश्रम, श्रृंग ऋषि आश्रम, जगदम्बनी आश्रम, रामनगर महल, श्रीमोहनबाबा आश्रम, कूम्हाघाट आश्रम, चिरईडोंगरी आश्रम, इंजीनियरबाबा आश्रम, चिरीकुटी आश्रम, फक्कडबाबा आश्रम, मूलडोंगरी घाट, सांगवा आश्रम, बेरपानी घाट, मैलीघाट
सिवनी
नागा बाबा का आश्रम तीर्थ यात्री के लिये, मोनीमाई आश्रम तीर्थ यात्री के लिये, मंदिर व घाट, मंदिर देवी नर्मदा जी का मंदिंर, कलकुही घाट, टिकरिया का मंदिर, माता जी का आश्रम
जबलपुर
पंचवटी (भेडाघाट), चौसठ जोगनी (भेडाघाट), धुआंधार, तिलवारा, ग्वारीघाट
नरसिंहपुर
झांसीघाट, बरमकुण्ड, महादेव पिपरिया, करहैंया नर्मदा, हीरापुर, समनापुर, चिनकी, बरमान कला, बरमान खुर्द, हीरापुर, लिंगा, बिल्थारी, सोकलपुर, खकरिया, किरखेडा, पीपरपानी (सोनादाह)
हरदा
गोंदागांवमठ, चीचोटकुटी, हंडिया
होशंगाबाद
रेवा बनखेड़ी घाट, सूरजकुंड घाट, बांद्राभान घाट,सेठानी घाट, खरखेड़ी घाट, ऑवली घाट
खण्‍डवा
ओंकारेश्वर/ ममलेश्वर, सिगाजी समाधि स्थल
खरगोन
महेश्वर किला, शालीवाहन मंदिर, सहस्त्र धारा, गंगातखेड़ी, पेशवा बाजीराव की समाधि
बडवानी
ग्राम राजघाट (कुकरा), बावनगजा
अलीराजपुर
बैजनाथ मंदिर ककराघाट
धार
अवधूत धाम नारायण कुटी धरमराय, कोटेश्वर कोटडा, बोधवड महादेव एकलबारा, मॉ नर्मदा मंदिर बड़दा, चीडी संगम शिव मंदिरकोठडा, बेठ संस्थान धरमपुरी, खलघाट
देवास
नेमावर, धर्मेश्वर महादेव मन्दिर, सीता मन्दिर, नर्मदा धारा जी बडासुर तपोस्थली, कवाडिया पहाड, सीता समाधि स्थान
सीहोर
दादाजी धूनी वाले, नर्मदा जी मंदिर, हंशेश्वर मंदिर, नीलकंठेश्वर मंदिर, आंवलेश्वर महादेव मंदिर, सूर्यकुण्ड, गोलेश्वर मंदिर
रायसेन
भृगु क्षेत्र मंदाकिनी गंगा, गरूणेश्वर तीर्थ, नारदेश्वर तीर्थ, वामन तीर्थ, पांडवद्वीप, मंगलेश्वर तीर्थ, केतु धाम, विलकेश्वर तीर्थ, राम जानकी मंदिर, जनकेश्वर तीर्थ, पतई

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