
अपनी मांगों को मनवाने प्रदेश के 45 हजार आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों की हड़ताल
जबलपुर. लॉकडाउन में सभी प्रकार के छोटे-बड़े उद्योग, धंधे, व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं। इसके बावजूद मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी की ओर से व्यवसायियों को भेजे गए बिल में फिक्स चार्ज भी शामिल है। इससे उद्योगपतियों और व्यापारियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि उत्पादन और व्यापार ठप होने की स्थिति में फिक्स चार्ज देने से उन्हें आर्थिक नुकसान हा़े सकता है। उद्योग धंधों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लोड के अनुसार फिक्स चार्ज लिया जाता है। यह फिक्स चार्ज 340 रुपए प्रतिकिलोवॉट पर होता है। खपत होती है, तो छह रुपए 40 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से बिल बनाया जाता है। इस हिसाब से फिक्स चार्ज बिल के लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक हो जाता है।
जो खपत हुई, उसका बिल मिले
सभी छोटे-बड़े व्यापारियों की मांग है, कि 22 मार्च के बाद से जब तक लॉकडाउन खत्म नहीं होता, तब तक की अवधि में एचटी लाइन वालों से केवल वह बिल ही लिया जाए, जिसकी खपत हुई है।
प्रदेश शासन और बिजली कम्पनी को पत्र लिखा है। इसके जरिए लॉकडाउन की अवधि में फिक्स चार्ज माफ किए जाने की बात कही गई है। यदि ऐसा नहीं होता, तो दोहरा आर्थिक नुकसान झेलना पडेग़ा।
शंकर नाग्देव, मानसेवी मंत्री, महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इन्ड्रस्टी
आम दिनों की अपेक्षा लॉक डाउन के दौरान बिक्री में कमी आई है। ऐसे में यदि फिक्स चार्ज देना पड़ा, तो मुश्किल बढ़ जाएगी। जितनी खपत हुई है, बिजली कम्पनी को उतना बिल लेना चाहिए।
मनीष वाधवानी, किराना दुकानदार
Published on:
04 May 2020 07:30 pm
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