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जबलपुर . बरेला स्थित शारदा देवी मंदिर की पहाड़ी का जंगल अंधाधुंध कटाई के चलते पूरी तरह उजड़ गया है। आम, इमली, सीताफल, कोहा, शीशम, सागौन, पलाश, जामुन के पेड़ों से जो पहाड़ी हमेशा हरी-भरी नजर आती थी, पर्यावरण के दुश्मनों ने उसे वीरान, बंजर जमीन के टुकड़े में तब्दील कर दिया है। यह पहाड़ी क्षेत्रीयजनों की आस्था से बहुत गहरे तक जुड़ी है। इसके बाद भी संरक्षण व देखरेख के अभाव में यह बिना पेड़ के दूर से पीली नजर आती है।
निर्माण कार्य के लिए काट दिया जंगल
क्षेत्रीय निवासी अरविंद झा का कहना है कि पहाड़ी लगभग 100 एकड़ के क्षेत्रफल में है। यहां जब मंदिर का निर्माण हुआ, तब तक पहाड़ी पर घना जंगल हुआ करता था। धीरे-धीरे आसपास के लोगों ने अपनी जरूरतों व उदर पालन के लिए लकड़ी बेचने के मकसद से इस पर कुल्हाड़ी चलानी शुरू की तो जंगल कटना आरंभ हो गया। आज इस पहाड़ी पर बड़े पेड़ खोजने पर भी इक्का-दुक्का नही नजर आते हैं।
मुरम खोदने वालों ने भी किया बर्बाद
पहाड़ी का जंगल पहले मनेरी रोड की ओर से कटना आरंभ हुआ। इसके बाद जहां-जहां के पेड़ काट डाले गए, उस जगह पर भवन निर्माण व अन्य कार्यों के लिए मुरम की अंधाधुंध खुदाई भी की गई। इसके चलते पहाड़ी पर कई जगह गड्ढे बन गए हैं। सूत्रों की मानें तो अभी भी पहाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में अवैध मुरम उत्खनन जारी है। इससे यहां पाई जाने वाली वनस्पतियां भी नष्ट हो रही हैं।
हर साल आते हैं हजारों लोग
यहां स्थित मां शारदा के मंदिर के चलते इस पहाड़ी की महत्ता बहुत अधिक है। दोनो नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। साल भर यहां लोगों का आना होता है। पर्यटन की दृष्टि से भी यह पहाड़ी महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ध्यान दे तो इस पहाड़ी को महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
Published on:
09 Jan 2020 01:58 am
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