
Fake milk-cheese : जिले में दूध का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। यहां से दूसरे शहरों और प्रदेशों को भी दूध की आपूर्ति की जाती है। दूध से बनने वाली पनीर की भी डिमांड है। दूध की कीमत 73 रुपये प्रति लीटर तक कर दी गई है, इसके बावजूद दूध और पनीर के सैपल मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की सैपलिंग और जांच में दूध के 4 व पनीर के 8 सैपल में गड़बड़ी मिली थी। इनमें फैट तय मानक से कम पाया गया था। जानकारों के अनुसार शहर में बड़े पैमाने पर मिलावटी दूध व पनीर बेचे जाने की आशंका है। इससे सेहत पर भी असर होता है। इसके बावजूद प्रशासन दूध और सह उत्पादों की गुणवत्ता जांच से लेकर इनकी कीमतों पर नियंत्रण के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
दरअसल एक आकलन के अनुसार जिले में लगभग 14 हजार किलो पनीर का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। जबकि पनीर की खपत लगभग 20 हजार किलो प्रतिदिन है। यानी उत्पादन क्षमता से 6 हजार किलो पनीर ज्यादा खप रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि ये पनीर किस प्रकार बन रहा है। ऐसे में मिलावट की बड़ी आशंका है। फिर भी डेयरियों व उनके काउंटर पर दूध व सह उत्पादों की नियमित जांच की व्यवस्था ही नहीं है।
उपभोक्ता जागरूक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि डेयरियों व उनके काउंटर में दूध समेत सह उत्पाद पनीर, दही, घी व अन्य की गुणवत्ता जांच नियमित रूप से की जाए। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाज पांडे ने मांग की है कि जिस तरह से जिला प्रशासन ने वर्ष 2014 से 2016 के बीच विभागों की संयुक्त टीम के माध्यम से डेयरियों में छापामार अभियान चलाया था, एक बार फिर से वैसी ही संयुक्त कार्रवाई की जाना चाहिए। जिससे की दूध व सह उत्पादों में मिलावट पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही दूध व सह उत्पादों की कीमत नियंत्रित करने भी प्रभावी कदम उठाया जाए।
Updated on:
13 Aug 2025 12:21 pm
Published on:
13 Aug 2025 12:19 pm
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