नर्मदा, समूचे विश्व में दिव्य व रहस्यमयी नदी है, इसकी महिमा का वर्णन चारों वेदों की व्याख्या में श्री विष्णु के अवतार वेदव्यास जी ने स्कन्द पुराण के रेवाखंड़ में किया है। इस नदी का प्राकट्य ही विष्णु द्वारा अपने विभिन्न अवतारों में किए राक्षस-वध के प्रायश्चित के लिए अमरकण्टक के मैकल पर्वत पर भगवान शंकर द्वारा 12 वर्ष की दिव्य कन्या के रूप में किया गया था। महारूपवती होने के कारण विष्णु आदि देवताओं ने इस कन्या का नामकरण नर्मदा किया। इस नदी से निकलने वाला हर पत्थर भगवान शंकर के शिवलिंग के रूप में निकलता है। जो बिना प्राण प्रतिष्ठा किए ही पूजा जाते हैं।