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पक्षियों की मौत बनी बीएसएनएल अधिकारियों के गले की फांस

जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी में वन विभाग  

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जबलपुर। बीएसएनएल के जबलपुर शहर के कैम्पस में तीन महीने पहले पेड़ों की कटाई-छंटाई से सैकड़ों पक्षियों और चूजों की मौत हुई थी। इस मामले में वन विभाग अब जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ वन्य प्राणी अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई कर रहा है। पेड़ों को काटने वाले फरार ठेकेदार रफीक खान उर्फ बल्लू खान की गिरफ्तारी के बाद श्रमिकों की भी तलाश की जा रही है। वन विभाग ने पक्षियों की मौत के मामले में वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। वन विभाग की ओर से तीन बार नोटिस जारी करने के बाद भी नगर निगम के उद्यान अधिकारी अनिल मिश्रा वन विभाग में नहीं पहुंचे हैं। जबकि, उद्यान विभाग के लिपिक अमित दुबे ने अपना बयान दर्ज करा दिया है।

ठेकेदार के बयान के बाद बीएसएनएल के अधिकारी भी फंसते नजर आ रहे हैं। बीएसएनएल के एमजीएम प्रशासन एमके नंदनवार ने नगर निगम के उद्यान विभाग के माध्यम से अनुमति दिए जाने को लेकर जिम्मेदारी से किनारा कर लिया था। जबकि, ठेकेदार ने बयान में कहा है कि पक्षियों के घोंसले टूटने के दौरान श्रमिकों ने कटाई रोक दी थी। लेकिन, बीएसएनएल के अधिकारी ने दोबारा कटाई शुरू करा दी थी। प्रकरण की विवेचना में अन्य अधिकारियों के नाम भी जुड़ सकते हैं।

बीएसएनल कैम्पस में 20 अक्टूबर को घोसले लगे हुए पेड़ों की कटाई-छंटाई की गई थी। 'पत्रिका में पक्षियों की मौत की खबर प्रकाशित होने पर वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की। पेड़ों की कटाई के चार दिन बाद शुरू किए गए रेस्क्यू मेंगैर विभागीय पक्षी प्रेमियों ने 150 से अधिक पक्षियों की जान बचाई थी।

शहर के पक्षी प्रेमी जब पेड़ों की टहनियों के नीचे दबे घायल पक्षियों का रेस्क्यू कर थे, तब बीएसएनएल के एसडीओ ने रेस्क्यू कर रहे एक युवक का मोबाइल छीन लिया था। अधिकारियों और गैर विभागीय विभागीय पक्षी प्रेमियों के बीच हुए विवाद का वीडियो भी वायरल हुआ था। इस दौरान वन विभाग के डिप्टी रेंजर और कर्मचारी भी मौजूद थे।

डीएफओ रवींद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि ठेकेदार बल्लू खान की गिरफ्तारी के बाद बयान लिए गए हैं। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। जो भी दोषी होंगे, उनके नाम विवेचना में जोड़े जाएंगे।