जबलपुर। त्यौहारों में प्रकृति पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। प्राकृतिक पूजन सामग्री, पेड़ पौधे और नदियों के जल के बिना कोई भी पूजन आदि नहीं होता है। क्योंकि शास्त्रों में प्रकृति पूजा को सर्वोपरि माना गया है। यानि प्रकृति को ही देव कहा गया है। गणेशोत्सव की तिथि नजदीक आते ही हर तरफ गणेश प्रतिमाओं की बिक्री शुरू हो गई है। वहीं मूर्तिकार भी गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। खास बात ये है कि सार्वजनिक पंडालों से लेकर घरों में विराजने वाले गणेश जी अब पूर्ण प्राकृतिक बनने लगे हैं। ये लोगों की जागरुकता का ही नतीजा है कि अब पीओपी समेत अन्य ऐसे पदार्थों से बनने वाली गणेश प्रतिमाएं जो जलाशयों, जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं वे अब बाजार में नजर नहीं आते हैं।

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