ganesh chaturthi घर ला रहे हैं ऐसे गणेश जी तो बनेंगे पाप के भागीदार, जानें इसका रहस्य

सजने लगे पीओपी मूर्तियों के मार्केट, टीम की नहीं नजर, पाबंदी बेअसर

By: Lalit kostha

Published: 22 Aug 2017, 11:34 AM IST

जबलपुर। प्रथम पूज्य भगवान गणेश की उपासना का उत्सव 25 अगस्त से है। मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी के बीच मूर्तियों के बाजार में चोरी-छिपे पीओपी (प्लॉस्टर ऑफ पेरिस) की मूर्तियां पहुंच चुकी हैं। नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते इनका बाजार चमक रहा है।

वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राकृतिक सामग्री से बने ही गणेश ही पूजने का विधान है। प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बनीं प्रतिमाओं का पूजन पुण्य के बजाये पाप का भागीदार बनाता है। पीओपी का इस्तेमाल जलस्रोत और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। कलेक्टर महेशचंद चौधरी ने सीआरपीसी की धारा १४४ के अंतर्गत पीओपी की मूर्तियों के क्रय, विक्रय, निर्माण एवं इस्तेमाल के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इसके बाद भी पीओपी से निर्मित छोटी-बड़ी मूर्तियों की खेप आ गई है। बड़ा फुहारा, हनुमानताल, दमोहनाका, गढ़ा, त्रिपुरी, सदर बाजार में ये खुलेआम बिक रही हैं।

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सिर्फ 1 जगह कार्रवाई
जिम्मेदारों ने सोमवार को बड़ा फुहारा में छापेमारी कर तीन दुकानों से पीओपी की मूर्तियां जब्त कीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. अजय खरे एवं नगर निगम के एएचओ ओपी गुप्ता ने बताया कि शंकर कोल, मनमोहन शर्मा एवं सनी सिंह ठाकुर की दुकान से प्रतिमाएं जब्त की गईं। इनके खिलाफ एक-एक हजार रुपए जुर्माना लगाया है।
होगा अधिक नुकसान
नर्मदा व सभी जलस्रोतों में जल स्तर कम है। एेसे में पीओपी का जहर ज्यादा नुकसानदायक होगा। विशेषज्ञों के अनुसार ये पानी में वर्षों नहीं घुलतीं। इसमें कैल्शियम सल्फेट, लेड एवं भारी धातुओं के कारण फैलता है। पेंट से जलीय जन्तुओं को नुकसान पहुंचता है।

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होगी कार्रवाई
पीओपी निर्मित मूर्तियों के क्रय, विक्रय, निर्माण एवं उपयोग प्रतिबंधित है। किसी के घर या दुकान में पीओपी की मूर्ति बरामद होगी तो कार्रवाई की जाएगी। पीओपी की मूर्तियों को लेकर जांच शुरू की गई है।
- एसएन द्विवेदी, आरएम, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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यह पाप होगा - गणेशोत्सव में धार्मिकता और संस्कृति का संगम है। इसमें पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण का भी ध्यान देना होगा। पीओपी की मूर्ति पूजा शास्त्र सम्मत नहीं है। मिट्टी की मूर्तियों की पूजा और उसके विसर्जन का विधान है। अगर हम पीओपी की मूर्ति पूजा कर उसे जलस्रोत में विसर्जित करते हैं, इसके रसायन से जलीय जीव नष्ट होते हैं तो पुण्य की जगह पाप के भागीदार बनते हैं।
- स्वामी श्यामदेवाचार्य


गोबर गणेश पूजें- प्राचीन परम्परा के अनुसार के गोबर गणेश का पूजन होता है। पूजा की मूर्ति में पीओपी जैसी चमक की कोई आवश्यकता नहीं है। भक्तों को चाहिए कि मिट्टी या गोबर से बनी मूर्ति का पूजन करें। मुरैना सहित कई क्षेत्रों में सांचे में गोबर की मूर्तियां बनाई जा रही है। उन्हें लेने से गौ शालाओं में पैसा जाएगा और गौ माता का संरक्षण होगा। गौ संरक्षण का पुण्य भी प्राप्त होगा।
- स्वामी अखिलेश्वरानन्द

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शास्त्र सम्मत नहीं- नर्मदा जी की धार धीमी है। विसर्जन कुंड में भी कम से कम मूर्तियों का विसर्जन होना चाहिए। पीओपी तो जहर है, यह शास्त्र सम्मत नहीं है। आस्था एेसी न हो कि प्रकृति और जन जीवन खतरे में पड़ जाए। लोगों को चाहिए कि घर में मिट्टी की छोटी मूर्ति बनाएं या लाएं, पूजा करें और एक लोटा नर्मदा जल लाकर अपने गार्डन में ही विसर्जन कर दें।
- साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, ब्रह्मर्षि बावरा मिशन


दिखावा न करें-  सवा सौ साल पहले लोक मान्य तिलक ने राष्ट्र हित में गणेशोत्सव शुरू कराया था। जिसने सांस्कृतिक स्वरूप ले लिया, यह अच्छी बात है। भक्तों को ध्यान देना होगा कि उत्सव में उपासना ज्यादा हो, न कि दिखावा। पीओपी का इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए। बारिश कम होने से नर्मदा में पानी कम है और प्रदूषण ज्यादा हुआ तो दुष्परिणाम झेलने होंगे।
- स्वामी चैतन्यानंद, शंकराचार्य मठ

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