
ganga sagar water poisonous video
जबलपुर। ताल तलैयों वाले इस शहर में अब अकाल के हालात बनते नजर आ रहे हैं। यहां के लोग और स्थानीय शासन व प्रशासन की अनदेखी से जल स्रोत खत्म होते जा रहे हैं या फिर इतने दूषित हो गए हैं कि उनका पानी स्पर्श करने पर भी रोग लग जाए। वहीं जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। मामला गंगासागर तालाब से जुड़ा है। जहां नालियों और सीवर का पानी इतनी मात्रा में मिल रहा है कि मछलियां दम तोडऩे लगी हैं। एक हफ्ते से मछलियां लगातार मर रही हैं। बावजूद इसके कोई भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
news facts-
तालाब के पानी से आ रही दुर्गंध
सूपाताल में मिल रही सीवेज की गंदगी
ऑक्सीजन कम होने से मर रहीं मछलियां
सीवेज लाइन की गंदगी और घरों का निस्तारी पानी मिलने से सूपाताल के पानी में प्रदूषण चरम पर पहुंच गया है। तालाब के पानी में बीओडी की मात्रा आदर्श जल के मानक से चार गुना अधिक हो गई है। नाइट्रेट, कैल्शियम, सोडियम और मैग्नीशियम की मात्रा भी मानक से कई गुना अधिक होने के कारण तालाब के पानी से दुर्गंध आने लगी है। पचास मीटर दूर से गुजरने वाले राहगीरों को नाक-मुंह ढंकना पड़ रहा है। पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने से मछलियां मर रही हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं है। करीब 12 साल पहले सूपाताल का डीसिल्टीकरण करने के बाद झील विकास प्राधिकरण ने 1.23 करोड़ रुपए से जीर्णोद्धार और नवीकरण किया था। इसके तहत तालाब में घाट का निर्माण, पिचिंग, रेलिंग, पाथ-वे, फ्लोटिंग फाउंटेन, लैंड स्केपिंग की गई थी। यह रमणीय स्थल बन गया।
सूपाताल के पानी में बैक्टीरिया की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि स्पर्श करने से भी त्वचा संबंधी बीमारी हो सकती है। पानी में प्रदूषण का स्तर बढऩे और ऑक्सीजन की मात्रा घटने से मछलियों की मौत हो रही है।
- विनोद दुबे, भू-जलविद्
&सूपाताल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अंडर ग्राउंड नाले-नालियों को तालाब में मिलने से रोकने के लिए इसके कायाकल्प की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। सीवेज लाइन का डायवर्सन किया जाएगा। स्थल पर ओपन कैफेटेरिया विकसित किया जाएगा। बैठक व्यवस्था दुरुस्त कर वॉक वे विकसित किया जाएगा।
- चंद्रमौलि शुक्ला, आयुक्त, नगर निगम
Updated on:
31 Jan 2019 12:06 pm
Published on:
31 Jan 2019 12:04 pm
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
