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Mantra – रोगों से मुक्ति दिलाता है ये देवी मंत्र

प्रतिदिन इस बीज मंत्र का जाप करने से दूर हो जाती हैं कई बीमारियां

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Lali Kosta

Apr 09, 2016

gayatri mata

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जबलपुर। सनातन धर्म के शास्त्रों में गायत्री मंत्र को बीज मंत्र माना गयाहै। माना जाता है कि गायत्री मंत्र के संयोग से ही महामृत्युंजय मंत्र, संजीवनी मंत्र के रूप में परिवर्तित हो जाता है। गायत्री मंत्र 'ओम भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं, भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्' है।
यह मंत्र अत्याधिक प्रभावशाली और चमत्कारिक माना गया है। इस मंत्र से कई रोगों का उपचार भी किया जाता है। गायत्री मंत्र का अनुष्ठान एक ऐसा उपाए हैं, जिससे मनुष्य के अंदर दिव्य शक्तियां प्रैदा होती हैं। जो मनुष्य में व्याप्त रोगों का नाश करती हैं। जो व्यक्ति स्वयं अनुष्ठान में सक्षम न हो, तो वह किसी भी विद्वान से यह कार्य करवा कर लाभ प्राप्त कर सकता है।


मंत्र दिलाता है रोगों से मुक्ति
ज्योतिषाचार्य सचिनदेव मे अनुसार एक निश्चित संख्या में गायत्री मंत्र का जप करने से रोगों को दूर किया जा सकता है। यदि बच्चा दूध न पीता हो तो गायत्री कवच का पाठ करते हुए बच्चे को जल पिलाते रहें, वह जल्द दूध पीने लगेगा।
- पीलिया से ग्रस्त बच्चे को रोग मुक्त करने गायत्री कवच से जल अभिमंत्रित करें और उससे बच्चे की आंखों को धोएं। ऐसा पांच या सात अथवा 11 दिनों तक करे, इसके साथ ही गायत्री मंत्र से मंत्रित जल रोगी को पिलाते रहें। मां गायत्री की कृपा से बच्चा जल्द ठीक हो जाएगा। डॉक्टर की सलाह भी इस दौरान लेती रहनी चाहिए।
- बच्चे को उल्टी दस्त में तीन शाम तक गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित जल एक-एक चम्मच पीने को दें। इससे उल्टी दस्त में आराम मिलेगा और बच्चा स्वस्थ हो जाएगा।
- साधारण बुखार है तो थोड़े से जल को 108 बार गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित कर दो-दो चम्मच हर तीन घंटे के अंतराल में रोगी को दें। यदि तेज बुखार है तो इसी जल की पट्टी मरीज के सिर पर रखें।
- सिर में तेज दर्द होने पर 108 बार गायत्री मंत्र का जाप कर रोगी को पानी पिलाएं। इस क्रिया से दर्द जल्द ठीक हो जाएगा।
- अनुष्ठानकाल मेें बच्चे के माता-पिता पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और शयन आदि भूमि पर करें। अनुष्ठान के समय उन्हें मन में गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।

सचिनदेव के अनुसार हिन्दु शास्त्रों में गायत्री मंत्र को शास्त्रकार मंत्र भी कहा गया है।गायत्री मंत्र के संयोग से ही महामृत्युंजय मंत्र, ओम नम: शिवाय, संजीवनी मंत्र में परिवर्तित हो जाता है। ब्रह्म शक्ति की प्राप्ति इसी महामंत्र की साधना से होती है। लेकिन इसका अनुष्ठान करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

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