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कटनी। 9 दिन पहले गंभीर हादसे की शिकार हुई छात्रा का इलाज कर रहे डॉक्टर ने ४ माह तक बिस्तर से नहीं उठने की सलाह दी। इस बीच कॉलेज में परीक्षा की समय सारिणी भी घोषित हो गई। हादसे की वजह से छात्रा को परीक्षा नहीं दे पाने और साल बर्बाद हो जाने का डर सताने लगा। ऐसी विषम परिस्थिति के बाद भी छात्रा ने हार नहीं मानी। परिजनों ने भी हौसला अफजाई की। माता-पिता व बहन के साथ अस्पताल से एम्बुलेंस के माध्यम से छात्रा कॉलेज पहुंची व सुरक्षा व्यवस्था के बीच पर्चा हल किया।
छात्रा को परीक्षा दिलाने पहुंची आधार काप निवासी मां सुनीता कुशवाहा ने बताया कि १८ मार्च को मानसी कुशवाहा (बीकॉम प्रथम वर्ष) सीढ़ी से उतर रही थी, तभी उसका पैर फिसल गया और वह लुढ़कते हुए नीचे गिरी। इसके चलते पैर बुरी तरह फ्रैक्चर हो गया। रीढ़ की हड्डी के साथ हाथ भी फ्रैक्चर हो गया। उपचार के बाद डॉक्टर ने ४ माह तक बिस्तर से नहीं उठने की सलाह दी। इधर, परीक्षा भी नजदीक आ गई। उसकी हिम्मत न टूटे, इसके लिए परिवार वालों ने संबल दिया व परीक्षा प्रभारी को परिस्थिति से अवगत कराया। साथ ही परीक्षा देने के लिए राइटर की मांग की। डॉक्टर की रिपोर्ट व छात्रा के स्वास्थ्य का परीक्षण करने के बाद परीक्षा प्रभारी ने राइटर के साथ छात्रा को परीक्षा की अनुमति दी।
छोटी बहन ने हल किया पर्चा
मानसी परिजनों के साथ सोमवार को अस्पताल से परीक्षा केंद्र शासकीय तिलक कॉलेज पहुंची। एम्बुलेंस में मौजूद छोटी बहन तृप्ती कुशवाहा (कक्षा १०) ने उसका पर्चा हल किया। परीक्षा प्रभारी एसबी भारद्वाज ने बताया कि परीक्षण के बाद उसे अनुमति दी गई। कॉपी लिखने के लिए छात्रा को आधे घंटे का अतिरिक्त समय दिया गया।
छात्रा द्वारा दुर्घटना के बारे में जानकारी दी गई थी। इसके बाद परीक्षण कराया गया। छात्रा का भविष्य खराब न हो इसलिए उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। परीक्षा के दौरान कोई नकल न हो, इसके लिए एम्बुलेंस के भीतर दो वीक्षकों की ड्यूटी भी लगाई गई थी।
- डॉ. सुधीर खरे, प्राचार्य शासकीय तिलक कॉलेज
Published on:
27 Mar 2018 04:47 pm
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