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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने अहम व्यवस्था दी है कि कर्मचारी के निधन के बाद उसकी विवाहित पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। इस सम्बंध में राज्य सरकार के एक नियम को संविधान के खिलाफ बताते हुए जस्टिस सुजय पॉल, जस्टिस जेपी गुप्ता और जस्टिस नंदिता दुबे की लार्जर बैंच ने यह फैसला सुनाया।
सतना जिले की अमरपाटन तहसील के ग्राम खूटा निवासी मीनाक्षी दुबे की ओर से यह अपील हाईकोर्ट में दायर की गई थी। आवेदक के पिता मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में लाईनमेन के पद पर कार्यरत थे। उनके 5 अप्रैल 2016 को हुए निधन के बाद आवेदक ने अनुकंपा नियुक्ति पाने एक आवेदन बिजली कंपनी को दिया था। उसका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि राज्य सरकार की 12 दिसंबर 2014 की नीति के तहत अनुकंपा नियुक्ति का लाभ सिर्फ पुत्र, अविवाहित पुत्री, विधवा पुत्री या तलाकशुदा पुत्री को ही दिया जा सकता है। इस फैसले के खिलाफ याचिका 8 जनवरी 2019 को खारिज होने पर यह अपील दायर की गई । याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुभव जैन, सुधा गौतम, आनंद शर्मा और सोनाली विश्वास ने पैरवी की।
याचिका खारिज होने के बाद युगलपीठ के समक्ष 8 जनवरी 2020 को मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की इन्दौर खण्डपीठ द्वारा मीनाक्षी के मामले पर दिए फैसले को नजीर के रूप में पेश किया गया। इस फैसले से सहमत न होकर दो जजों की बेंच ने सरकार के नियम को असंवैधानिक ठहराने से इंकार करते हुए मामला लार्जर बेंच को भेजने की अनुशंसा की थी।
Published on:
12 Mar 2020 10:25 am
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