शौर्य भारद्वाज ने कहा कि दीपावली वैसे तो आत्म अवलोकन का पर्व है। इस रात अपने शरीर की आंतरिक शक्तियों को जाग्रत करके खुद को देश और समाज की सेवा के लिए तैयार करना चाहिए। पर्वों में भी परमार्थ की सीख है। आप स्वयं देखें कि दिवाली पर मिट्टी के दीये, रुई, मालाएं, लाई-बताशा, मूर्तियां, खिलौने और ना जाने क्या-क्या बिकता है। बनाने वाला हिन्दू हो या मुसलमान, इससे कई घरों और परिवारों की दीवाली रोशन होती है। उनका उदर-पोषण होता है। हमें ऐसे पर्वों का संरक्षण करना चाहिए।